Tuesday, 19 December 2017

जिग्नेश मेवानी ने कांशीराम द्वारा स्थापित मिथक / भ्रमजाल को तोड़ा ?

बिना बसपा के कोई नेता नही बन सकता, ऐसा मिथक बहुजन मसीहा ने रचा था जिस कारण से युवा नेत्तुत्व उभर नही पा रहा था | चाटुकार और पैसे वाले टिकटे खरीदकर अपना और अपने बच्चों का भविष्य चमका रहे थे और आंबेडकरवादी युवा सडक पर जुते खा रहा था! इस मकडजले मे पुरा मिशन उलझकर रह गया!

जिग्नेश की जीत से आज पूरे भारत के दबे कुचले युवाओ मे एक विश्वास निर्माण हुआ है कि हम भी समाज का नेत्तुत्व कर सकते है! खासकर वो युवा जो कांग्रेस भाजपा मे अपना भविष्य तलाश रहे थे उन्हे भी अपने बल पर कुछ करने का हौसला बढा है |

मगर जिग्नेश की जीत से मुवमेंट के पुराने सामंतो के पेट मे दर्द शुरू हो गया है! बसपा और बामसेफी जिस तरह से एक निर्दलीय विधायक पर हमला कर रहे है उससे उल्टा इनकी ही जग हसाई हो रही है! दुसरे धर्म और समुदाय के लोग इन स्थापित सामंतो की भीखमंगी हरकतो को देखकर मुस्कुरा रहे है |

बसपा और बामसेफी जिग्नेश का विरोध क्यो कर रहे है? वो ऐसा है इनके यहा जो युवा है वो सवाल कर रहे है, जब एक अकेला जिग्नेश जीत सकता है तो तुम्हारे इतने बडे संगठन मिलकर एक सीट नही जीत सकते! इसलिए मेवानी को टारगेट करके अपने कैलंडरो के मन मे उठते सवालो को दुसरी दिशा मे मोड रहे है | पापी पेट का सवाल है और इन सबसे इन सामंतो के धंधे पर फर्क पडता है |

मुझे गर्व है कि महाराष्ट्र के नेताओ ने जिग्नेश को सपोर्ट किया जिसमे बाबासाहेब के पौत्र प्रकाश आंबेडकर, कवाडे सर, सुरेश माने और अन्य नेताओ ने भी सर्मथन दिया है! वैसे महाराष्ट्र के लोग बाबासाहेब की दी गई जिम्मेदारी से खुश है! इसलिए दुनिया मे कोई भी समाज हित मे संघर्ष करेगा उसे हमारा सर्मथन होगा ही! चंद्रशेखर आजाद के लिए उतर प्रदेश के लोग सडक पर नही उतरा पर महाराष्ट्र के लोग भीम आर्मी के सर्मथन मे सडक पर उतरे ! पहलै कांशीराम की मदद की अब बारी जिग्नेश की है |

एक कॉलेज मे ग्रुप डिस्कशन मे वामपंथी मित्र कह रहे थे जय भीम वाले चिढाते है " लाल भगवा एक है, सारे कामरेड फेक है " !इसपर जिग्नेश ने कहा, मायावती ने मोदी का प्रचार किया इस कारण से निला - भगवा एक है , सारे बहुजन फेक है : जैसे नारे  नही लग सकते !

रही बात जिग्नेश की तो उसने कभी कहा नही कि वो आंबेडकरवादी है | रोहित वेमुला और हैदराबाद के अन्य साथियों पर वामपंथी विचार हावी थे वैसे ही जिग्नेश के भी हो सकते है! दुसरी बात वो खुद को दलित कहलाना पसंद करता है पर सभी जानते है खुद को दलित कहलाने वाला कभी आंबेडकरवादी नही हो सकता!

- चेतन तांबे, समाजिक कार्यकर्ता एंव अम्बेडकरवादी विचारक

Saturday, 2 December 2017

मायावती की दहाड़ बैलेट पेपर से चुनाव कराने की दी चुनौती


 यूपी निकाय चुनाव में बीएसपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है.
मायावती ने दी बीजेपी को चुनौती
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की.
'बैलेट पेपर से हुए चुनाव तो बीजेपी हारेगी'

लखनऊ: यूपी निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत पर बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. मायावती ने कहा कि बीजेपी ईमानदार है तो ईवीएम का इस्तेमाल को बंद कर बैलेट पेपर से चुनाव कराए.  उन्होंने कहा ''अगर बीजेपी ईमानदार है और लोकतंत्र में विश्वास करती है तो ईवीएम के इस्तेमाल को बंद करे और बैलट पेपर से चुनाव करवाए. 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं. अगर बीजेपी को विश्वास है कि जनता उनके साथ है तो वे बैलट पेपर से चुनाव कराए. मैं यह दावे के साथ कहती हूं कि 2019 में बैलट पेपर से मतदान हुए तो बीजेपी दोबारा सत्ता में नहीं आएगी."

यूपी निकाय चुनाव में बसपा की वापसी:

गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश निकाय चुनाव में बीजेपी के बाद बीएसपी ने ही अच्छा प्रदर्शन किया है. पार्टी ने पहली बार अपने चुनाव निशान पर राज्य में निकाय चुनाव लड़ा है और मेरठ-अलीगढ़ के मेयर की सीट पर कब्जा कर लिया है. हालांकि इस चुनाव में मायावती ने खुद कहीं भी प्रचार नहीं किया लेकिन पूरे अभियान पर नजर बनाए रखी थी.

बीएसपी ने इस चुनाव में सपा को तीसरे नंबर पर धकेल दिया है और कई जगहों पर दूसरे नंबर रही है. सोशल मीडिया में इस वक्त ईवीएम के खिलाफ अभियान भी चल रहा है अभी जो आंकड़े प्राप्त हो रहे हैं चौकाने वाले हैं गौरतलब हैं कि जहाँ भी ईवीएम मशीन के माध्यम से वोटिंग हुई हैं वहाँ बीजेपी जश्न मना रही हैं किंतु बैलेट पेपर के माध्यम से जहाँ भी चुनाव हुये हैं वहाँ बीजेपी बुरी तरह हारी हैं.
इसी आधार पर विपक्ष ईवीएम प्रणाली पर सन्देह व्यक्त कर रहा है.

Thursday, 9 November 2017

बौद्ध धम्म का गौरवशाली इतिहास अब नही छुप सकता..

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह (भाषा वैज्ञानिक) बौद्ध धम्म के गौरवशाली इतिहास की सच्चाई परत दर परत उजागर कर रहे हैं अभी हाल ही में उन्होंने ने फेसबुक पर यह रोचक लेख प्रकाशित किया था आइये पढ़ते हैं!

कहा जाता है कि मेनाण्डर ने सिकन्दर से भी अधिक राष्ट्रों पर विजय पाई थी, यूनानी लेखकों ने जिसे महान विजेता बताया है। जी हाँ, वहीं मेनाण्डर ने चलाए थे - धम्म चक्क के सिक्के! धम्म चक्क के सिक्के!! धम्म चक्क के सिक्के!!!

मेनाण्डर इंडो यूनानी राजाओं में सबसे महान था। वह दूसरी सदी ईसा पूर्व में शासन करता था। उसकी राजधानी शाकल में थी। राजधानी से 200 योजन दूर कालसी नामक गाँव में उसका जन्म हुआ था। उसके बारे में कई जानकारियाँ बौद्ध ग्रंथ मिलिन्दपह्न से मिलती हैं। वह एक बौद्ध राजा था। उसने धम्म चक्क के सिक्के चलाए थे। उसका राज्य अफगानिस्तान, उत्तर- पश्चिमी सीमा प्रांत, पंजाब, सिंध, राजपूताना, काठियावाड़ और संभवत: पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था... और एक दिन  सैनिक शिविर में उसकी मृत्यु हो गई। http://भारत में बौद्ध धम्म छुप गया और दुनियाँ में छा गया जानने के लिए पढ़िये
डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह कई राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, सेमिनारों एवं कार्य-शालाओं में सहभागिता तथा व्याख्यान कर चुके हैं।

Wednesday, 27 September 2017

कौन लड़की देवदासी बनेगी इसका फैसला मंदिर का पुजारी करता था वह लड़की

युवा लेखक उदय कुमार गौतम ने भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर जी को केंद्र में रखकर यह मार्मिकता भरा जबरदस्त लेख लिखा है भारत की आधुनिक नारियों के लिए पढ़िये..

आधुनिक युग विज्ञान का युग है, बेटी आज तुम आयी हो पुष्प चढ़ाने तुम्हें अपने पास पाकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया है तुम्हारे नाम के आगे लगे योग्यता के प्रतीक(डॉ, प्रोफेसर, इंजीनियर, एडवोकेट)तुम्हें भी बड़ा होने का एहसास दे  रहे है। अपनी योग्यता से तुम भी अपने आप को पुरषो के बराबर समझने लगी हो। तुम्हारी उपलब्धियों से मुझे संतोष मिला है जैसा मैं सोचता था वैसा तुम बन पा रही हो । पहले तुम घर तक सीमित रहती थीं, परिवार की देख भाल करती थी अब घर से बाहर भी काम करती हो ।
धन कमाने के लिए नौकरी भी करती हो अब तो तुम्हारे कंधो पर दुगुना बोझ आ पड़ा है घर भी संभालो और दफ्तर, आफिस भी ज्ञान प्राप्ति के बाद बोझ कम होना चाहिये था लेकिन तुम्हारा बोझ और भी बढ़ गया है । ऐसा मैंने नही सोचा था जब तुम ऑफिस से घर आती हो तो काम के बोझ से ऊब जाती हो ऑफिस का काम घर के काम पर भारी पड़ता है पति के साथ झगड़ा भी होता है। तुम मुझे कोसती हो जब अनपढ़ थी तो केवल घर का ही काम करना पड़ता था अब ऑफिस संभालो और घर भी।
यह गलती मेरी नही थी, बेटी यह तुम्हारी समझ का फल है तुमने ठीक से नही समझा, ज्ञान का उपयोग बेड़ियां काटने के लिये किया जाता है।

ज्ञान से आदमी अपनी अज्ञानता, अंधविश्वास और जड़ता को तोड़ता है ज्ञान ही मुक्ति के मार्ग का एक साधन है लेकिन तुमने इस मुक्ति के साधन को केवल जीवन चलाने के लिए, धन अर्जित करने के लिए इसका उपयोग कर रही हो तुमने उस ज्ञान से मुक्ति की संभावनाओ को नहो देखा इसलिए यह सब भुगतना पड़ रहा है। मैंने तो तुम्हारे जीवन को बड़ी ही बदतर हालात में देखा है।
क्या था तुम्हारे पास? इस देश में महिला भी ब्रम्हा के पैरों से पैदा हुई ब्राम्हण के घर वह ब्राह्मणी कहलाई लेकिन महिला होने के कारण शूद्र ही रही शूद्र और शोषण एक दूसरे के पर्यायवाची सब्द है तुम महिला के रूप में पैदा हुई हो इसलिए शोषण तो होगा ही ऐसी मान्यता ने महिलाओं को समर्पित कर दिया शोषण की चक्की में पिसने के लिए। मैंने देखा है उस दौर को कोई नही सुनता था।
जब कोई पुरूष मरता था, तब उसी के साथ तुम्हें भी जलाया जाता था । तुम चीखती थी.........
चिल्लाती थी........ 

जलकर नही मरना चाहती थी लेकिन असहय बनकर रह जाती थी । शरीर के किसी अंग पर एक चिंगारी पड़ जाय तो हम चिल्ला उठते हैं तुम्हारा तो पूरा शरीर जलता था तुम चिल्लाती थी, बचकर भागना चाहती थी ,लेकिन स्वयं को बचा नही सकती थी। तमाम औरते गीत गा गाकर करके तुम्हे प्रेरित करती थी, जलकर मरने के लिए, ढोल और नगाड़े बजते थे, उनकी तेज आवाज में तुम्हारी चीख दबकर राह जाती थी। तुम चिल्लाती रहती थी ढोल नगाड़े बजते रहते थे । फिर कहा जाता था तुम सती हो गयी जलकर मारने का अहसास किसी को बता भी नही सकती थी, सती होने का गौरव भी पा जाती थी फिर तुम्ही ने पूजा है। उस सती को जिसे जबरन धर्म के नाम पर जिंदा जलाया तुम्हारी इस नासमझी ने अन्य औरतों को मारने के लिये मजबूर किया लाखो बेगुनाह मार चुकी है। इस पाखंडवाद की बली पर परंतु अब मैंने इसे इतिहास के काले पन्नो में दफन कर दिया है। अब न कोई सती होती हैं और न कोई सती कर सकता है । मेरे द्वारा लिखा हुआ कानून तुम्हारी सुरक्षा का कवच है । लेकिन तुमने उसे समझा नही तुम्हारे साथ अतीत में क्या क्या घटा देखकर सिहरन सी पैदा है मैं तड़प उठता हु जब मैं तुम्हारे अतीत को देखता हूँ। लेकिन तुम्हे क्या? तुमने तो पढ़ना ही बंद कर दिया पढ़ाई का मतलब केवल परीक्षा पास करने से ही राह गया।काश तुम ठीक से पढ़ना जान जाती तो जीवन की परीक्षा में भी पास हो जाती।तुमने नही पढ़ा पर मैंने पढ़ा है।मैं जानता भी हु औऱ मैंने देखा भी है।

जिन धार्मिक मान्यताओं को तुम जीवन का आधार समझती हो वही तुम्हारी बेड़ियां है । तुमने युवावस्था में शिव का व्रत किया अच्छा पति पाने के लिए। अनेकों बार व्रत किए पार्वती की कहानी भी सुनी फिर भी ना समझ सके तुम्हारी शादी हुई पति शराबी मिला क्योंकि जब नशा करने वाला तुम्हारा आदर्श है तो पति भी वैसा ही मिलेगा। शराबी मिला वह तुम्हें पीटता है तुम पिटती रहती हो । वह तुम्हें आग में जलाता है तुम जलकर मर जाती हो। शिव की पत्नी भी जलकर मरी थी क्या सीखा तुमने यह मृत्यु का मार्ग है तुम उसी मार्ग पर चली हो इसलिए प्रतिपल मरती हो तुम बच सकती हो अच्छे आदर्श को पाकर। बिना प्रयास किए ज्यादा पाना चाहती हो इसलिए कभी सोमवार कभी मंगलवार शनिवार और रविवार का व्रत करती हो । कभी पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हो तो कभी संतानों की सुरक्षा के लिए साउ माता का। कोई भी तो काम नहीं आता जब मैं विलायत पढ़ने गया रमा घर पर रहती थी जब वह अकेली थी वह भी तुम्हारी ही तरह अंधविश्वास का शिकार हो गई देवी-देवताओं में विश्वास करने लगी अपनी संतानों की लंबी उम्र के लिए उपवास भी रख करने लगी यह उसका भ्रम था । मैं जानता हूं घर में धन की कमी थी बच्चों को ठीक से भोजन नहीं मिला कुपोषण की वजह से बीमार हो गए इलाज के लिए धन नहीं था एक-एक करके मौत के मुंह में समा गए।

मेरी भी एक बेटी थी मेरे विदेश जाने के बाद पैदा हुई रमा ने उसका नाम इंदु रखा मैंने भी अपनी बेटी के लिए अनेकों कामनाकी  है कि मैं तो हजारों मील दूर था मैंने बेटी को देखा भी नहीं था इसी सामाजिक गैरबराबरी का शिकार इंदु जीवनी थी वह बीमार हो गई इलाज के लिए धन नहीं था लेकिन रमा को भरोसा था ईश्वर दैवी शक्ति पर उसने भी उपवास रखा लेकिन इंदु का जीवन नहीं बचा सकी 9 माह की अवस्था में ही इंदु इस दुनिया से विदा हो गई। इंदु के अलावा भी रमा की कोख से पैदा हुए गंगाधर, रमेश और राजरतन ने शिशु अवस्था में ही दम तोड़ दिया। जीवन में नीरसता आ गई इंदू की मौत के बाद रमा ने कोई उपवास नहीं रखा अज्ञानता का भ्रम और देवताओं के प्रति श्रद्धा खत्म हो गई भले ही रमा ने अपनी संतानों को खोया किंतु उसमें आत्मविश्वास था अब वह अज्ञात भय से मुक्त थी मैंने रमा को अनपढ़ होते हुए भी भ्रम से मुक्त देखा है लेकिन तुम तो पढ़ी लिखी हो भ्रम का शिकार हो कर भ्रमित रहती हो ।

जब मैं भारत का कानून मंत्री बना वह मेरे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण समय था मुझे अपनी शक्ति में पूरा भरोसा था देश कानून से चलता है और कानून मुझे बनाना था मेरी छटपटाहट तुम्हें मुक्त करने की थी।
मेरी आंखो के सामने धर्म के नाम पर तुम्हारे साथ खेला जाने वाला घिनौना खेल था मैंने देखा कि भूदेव जो स्वयं ईश्वर की आज्ञा से कानून बनाते थे बहुत अनैतिक थे नंबूदरी ब्राह्मण संबंधन नाम के धार्मिक कानून का हवाला देकर किसी भी शूद्र महिला के साथ विवाह कर लेते थे या विवाह भी अजीब था नंबूदरी ब्राह्मण विवाह करता था लेकिन उस महिला का पति नहीं होता था इस विवाहित महिला की ससुराल भी नहीं होती थी वह लड़की अपने पिता के घर पर ही रहती थी रात के अंधेरे में वह नंबूदरी ब्राह्मण आता था और उस महिला का शारीरिक शोषण करता था उजाला होने से पहले ही चला जाता था रात के गहन अंधकार में उसकी अनेक रिक्ता दफन हो जाती वह महिला तड़पती रहती विवाह हुआ पति नहीं ससुराल नहीं संतान भी पैदा होती पर पिता का नाम नहीं हजारों हजारों महिलाओं का जीवन कुर्बान हो गया संबंधन नाम के ब्राह्मण के साथ हुए विवाह के नाम पर मुझे बड़ा असहनीय लगता था।

जब किसी धर्म के ठेकेदार भूदेव की कुदृष्टि शूद्र के घर में पैदा हुई बच्ची पर पड़ती तो वहां परपंच करता गांव में अकाल पड़ने वाला है ,महामारी फैलने वाली है ,बाढ़ आने वाली है ,देवता कुपित हो रहे हैं, अगर पूरे गांव को बचाना है ,तो उसके लिए एक लड़की को देवदासी बनाना पड़ेगा । भूदेव ब्रम्ह का स्वरुप है सब को भ्रमित कर देता है ब्रह्मा के आदेश को न मानने की सजा भी थी भला सूद्र कैसे दुस्साहस कर सकता था  कोई भी पिता अपनी बेटी को देवदासी नहीं देखना चाहता ब्राम्हण का आदेश गांव पर आने वाली विपत्ति का डर और अनर्थ की आशंका से सभी बेजुबान हो जाते थे । कोई अपनी बेटी को देवदासी बनाने में मना भी करता तो उसे दंडित किया जाता मौत की सजा भी कोई जुर्म नहीं थी एक पिता मरकर भी अपनी बेटी को देवदासी होने से नहीं बचा सकता था।
कौन लड़की देवदासी बनेगी इसका फैसला मंदिर का पुजारी करता था वह लड़की केवल सुंदर समाज से ही होती थी चिन्हित लड़की का विवाह मंदिर में विराजे पत्थर की मूर्ति के साथ कर दिया जाता था शादी के बाद लड़की की ससुराल वह मंदिर बनता था वह मंदिर में चली जाती देवता कभी प्रसन्न होते तो कभी कभी तू चाहे देवता प्रसन्न हूं या कुवैत दोनों अवस्थाओं में उस देवदासी को मंदिर के पंडों की कामवासना का शिकार होना पड़ता था देवता खुश भी होता तब भी पंडे शरीर नोचते थे और देवता कुपित होता तब भी।
देवदासी को संतान भी पैदा होती थी पत्थर की मूर्ति ने देवदासियों से संतान भी पैदा की लेकिन पिता का नाम नहीं दिया उनकी संतानों को हरिजन कहा जाता है दक्षिण भारत में हजारों देवदासियां आज भी धर्म के नाम पर पंडों की रखैल बन रही है उनकी संताने हरिजन होने का गौरव पा रही हैं।
यह सब असहनीय था मेरे लिए मैं नहीं चाहता था किसी पिता की कोई बेटी देवदासी बनकर पंडों की कामवासना का जीवन भर शिकार रहे इसे कानून से रोका जा सकता था भले ही कोई भी लेकिन तुम्हारा यहां पिता कमजोर नहीं था मुझे अपने ज्ञान और कलम की ताकत पर भरोसा था मुझ में सक्ति थी इस अनैतिकव्यवस्था को बदलने की। इसे कानून से रोका जा सकता था तब ब्रम्हाड़ के आदेश को मना नहीं कर सकता था अनर्थ की आशंका से बेजुबान हो गया था लेकिन तुम्हारा यहां पिता कमजोर नहीं था मुझे अपने ज्ञान और कलम की ताकत पर भरोसा था मुझे सक्ति थी इस अनैतिक व्याभिचार को रोकने की।

मैंने तुम्हें सफेद वस्त्रों में सिर मुंडवाते हुए देखा है बाल अवस्था में की शादी हो जाती थी वह लड़की ससुराल भीें नहीं गई, पति को देखा भी नहीं, शादी का अर्थ क्या होता है मालूम ही नहीं था, पति मर गया वह विधवा हो गई, पति कैसे मरा किस बीमारी से मरा इलाज करवाया भी कि नही, कोई पूछता भी नहीं था ,कोई सवाल नहीं करता था, बस एक ही बात थी कि तुम विधवा हो, तुम अपशकुनी ,हो सौंदर्य का कोई अर्थ नहीं सिर मुंडवा दिया और सफेद वस्त्र पहना दिए बस तुम एक विधवा हो यह विधि का विधान है भाग्य का फल और कर्मों की मार मानकर चलती रही हो । जिस मां ने तुम्हें जन्म दिया वह भी कोसती थी पिता का प्यार भी नहीं वहां भी ताने देता था तो तुम नहीं भाई के शादी में चाहे तेल उतारना ही हो यह काम एक सुहागे नहीं कर सकती थी हर एक खुशी का क्षण तुम्हें जीने का अवसर नही देता था और तुम रोती थी अपने भाग्य और किस्मत को कोसती थी तुम रोती रही कोई नहीं सुनता था। तुम्हें सफेद वस्त्र इसलिए पहनाए थे कि तुम पवित्रता का जीवन जीओ तुमने जीना भी सीखा जीवन में पवित्रता को बनाए रखने के लिए सजगता से चरित्र की पहरेदारी भी की लेकिन तुम फिर भी कलंकित रही समाज के तथाकथित चरित्रवान लोगों की कुदृष्टि का शिकार बनती रही ।दिन के उजाले में जो नैतिक रहते थे ,धर्म की मर्यादाओं का बखान करते थे, उन्होंने ही तुम्हें रात के अंधेरे में लूटा है नैतिकता के मापदंडों को तार-तार किया है। चरित्रहीन होने का आरोप भी तुम्हारे माथे पर काली बनकर लिपटा रहा है तुम्हारे साथ अनैतिकता का खेल खेलने वाले अनैतिक पुरुषों पर आज तक कोई उंगली नहीं उठी।

पवित्रता तुम्हारा गहना था प्रत्येक पुरुष तुम्हें पवित्र देखना चाहता था ताकि तुम्हारा इस्तेमाल कर सके लेकिन अफसोस तो इस बात का है कि कोई महिला भी तुम्हारे दुख को नहीं समझ सकी उसने भी तुम्हें कुल्टा कहा ,दुश्चरित्र कहा, शब्द कम पड़ सकते हैं परंतु तुम्हारे दर्द कम नहीं।
जिस व्यक्ति की पत्नी मर जाए वह कितनी भी शादी कर ले लेकिन पति के मरने पर तुम नहीं कर सकती थी पत्नी की मृत्यु पर कोई पुरुष सिर मुंडवाकर सफेद वस्त्र नैतिकता का उसका अपना मापदंड है विधवा तड़पती रही है हजारों महिलाएं को चलती रही है किसी ने इस नर्क से छुटकारा भी पाना चाहा तो केवल एक ही मार्ग था स्वयं की हत्या का। आत्महत्या ही मुक्ति का इकलौता मार्ग था ।मैंने तुम्हें असहाय अवस्था में देखा है तुम्हें इस दशा में देख कर मेरी रूह कांप उठती थी आन्दोलित हो गया था मैं तुम्हारी मुक्ति के लिए। क्या ये ईश्वर तुम्हारी रक्षा में न आया हो लेकिन मुझे कोई नहीं रोक सकता था।
पिता की संपत्ति में तुम्हारा कोई हिस्सा नहीं था। पति की संपत्ति तुम्हारी नहीं थी। तो फिर तुम क्या थी केवल महिला, नारी ,पत्नी,  मां ,बहन रिश्ता कुछ भी अधिकार कोई नहीं । तुम केवल औरत थी केवल औरत जिसको प्राकृतिक नियमों के तहत पैदा होना था पैदा हुई केवल उपभोग के लिए शब्दों के पर पंच ने तुम्हें गुमराह किए रखा । तुमने राखियां भी बांधी कोई भाई तुम्हारी लाज बचाने नहीं आया।
तुमने पति की लंबी उम्र की कामना भी की व्रत भी किए ताकि तुम्हारा पति जीवित रहे किसी पति ने कोई यत्न नहीं किया की पत्नी भी लंबी उम्र जिये । तुम पति की मृत्यु पर जिंदा जलकर मरी ,सती बन गई लेकिन कोई पति पत्नी के साथ जलकर नहीं मरा।
तुमने मां बनकर संतानों की परवरिश भी की कोई भी संतान तुम्हें रूप ना दे सकी । मां चाहे पति की चिता पर जल रही हो चिल्ला-चिल्लाकर जीवित रहने के लिए तड़प रही हो संताने मौत की दर्शक बन गई कोई बेटा अपनी मां को बचाने नहीं आया। मां विधवा रही, बहन विधवा हो गई ,बेटी विधवा हो गई, बेटा ,भाई, पिता सब रिश्ते खत्म हो गए किसी ने तुम्हारी परवाह नहीं कि तुम अकेली थी इस वीरान में पति जीवित रहा तो तुम भी जीवित थी पति मर गया तो तुम भी मर गई।

लेकिन मैं एक मां का बेटा भी हूं मैं भी बहन का भाई हूं और अपनी पत्नी का पति । मैंने अपनी शक्ति को समझा मैं भारत का कानून मंत्री बना मेरे द्वारा बनाया गया संविधान भला तुम्हें गुलाम कैसे रहने देता मैं प्रयास में जुट गया।
मैं नेहरू, पटेल ,राजेंद्र प्रसाद व सभी को समझाने लगा पर यह ब्राम्हणवादी लोगों ने मेरी बात को मानने से मना भी किया था मैंने मुक्ति का दस्तावेज था तुम्हारे बराबरी के अधिकारों का शस्त्र था।
मैं पूरी तैयारी के साथ देश की लोकसभा में हिंदू कोड बिल लेकर आया देश का प्रधानमंत्री ब्राम्हण था, राष्ट्रपति ब्राम्हण था, गृहमंत्री तो सूत्र था लेकिन उसे छत्रिय होने का अभिमान था क्या ब्राम्हण, क्षत्रिय ,वैश्य, शूद्र यह सब अलग-अलग थे लेकिन तुम्हारी मुक्ति के दस्तावेज के विरोध में सब एक हो गए नेहरू जो मुझसे वादा करके गया था कि वह साथ देगा वह भी मुकर गया उन्हीं के साथ हो गया मैं तुम्हें मुक्त करना चाह रहा था और उन्हें ब्राम्हण का वर्चस्व खत्म होता दिख रहा था। मैं अकेला था लेकिन दूसरी और सभी थे वह ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी मेरे विरुद्ध हो गए मैंने इस लड़ाई को बहादुरी से लड़ा ।न ही कोई मुझे मना कर सकता था। और ना ही ज्ञान की दलीलों से मुझे कोई हरा सकता था । मैंने तुम्हारी मुक्ति के लिए दलील दी मेरे जवाब के लिए किसी के पास कोई दलील नहीं थी किसी के पास कोई जवाब नहीं था यह सब असहाय हो गए कानून के रूप में संविधान तुम्हें पूरा संरक्षण देने के लिए तैयार था । मेरे द्वारा बनाया जाने वाला कानून तुम्हारे संरक्षण का मजबूत कवच था। सभी लोग तुम्हारे विरुद्ध खड़े हो गए मैं अकेला योद्धा बनकर लड़ा पर कानून न बन सका। देश के सांसदों का मत तुम्हारे विरुद्ध था। लोकसभा में हिंदू कोड बिल गिर गया मैं एक कमजोर कानून मंत्री बन कर नहीं रह सकता था। उस समय अपना त्यागपत्र लेकर प्रधानमंत्री के पास चल पड़ा । राजेंद्र प्रसाद जो राष्ट्रपति है उन्होंने मुझे पद छोड़ने की धमकी दी। गृहमंत्री पटेल भी ऐसी ही धमकी दे रहे थे मुझे क्षमा करना ऐसा नेहरू नेकहकर छमा मांगी थी ।मुझे कानून मंत्री बने रहने के लिए निवेदन भी करता रहा लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता था।
मैं उस समय देश की लोक सभा में हिंदू कोड बिल पर अपना व्यक्तव्य देना चाहता था। लेकिन सभापति ने क्योंकि वह जानते थे कि मैं उनकी तुम्हारे प्रति मानसिकता को सबके सामने रख दूंगा ।वे पर पंच तो तुम्हारे हीतैसी होने का करते हैं। लेकिन कार्य तुम्हारे विरुद्ध। प्रधानमंत्री कमजोर हो सकता है। लेकिन कानून मंत्री के रूप में मै नहीं और मैं चला आया देश की लोकसभा में तुम्हारी मुक्ति का बीज बोकर आज मेरे द्वारा तैयार किया गया हिंदू कोड बिल टुकड़े-टुकड़े करके पास हो चुका है अब तुम कानूनी रूप से स्वतंत्र हो तुम्हारा पुरुषों के साथ समान सत्ता और संपत्ति में बराबर की भागीदार भी हो मैंने ना केवल तुम्हें बराबरी का दर्जा दिया है बल्की पुरुषों के एकाधिकार और वर्चस्व को समाप्त भी किया है अब तुम स्वतंत्र हो मैं तुम्हें स्वतंत्रता देना चाहता था लेकिन एक और नई गुलामी तुमने ओढ़ ली है तुम मुझ में भरोसा  नहीं करती हो तुम भूल चुकी हो तुम्हारा मुक्तिदाता कौन है आज फिर तुम मेरे बताए मार्ग पर ना जाकर ब्राम्हणवाद के दलदल में जाकर फंस रही हो।

मैंने तुम्हें ज्ञान को मुक्ति का मार्ग पता करके उस पर चलने के लिए कहा था तुम नामदान और ध्यान के मार्ग पर चल पड़ी हो मैंने तुम्हें दाढ़ी वाले पाखंडी पन्नों से बचने के लिए कहा था आज तुम उन्हीं की शरण में जाने लगी हो मैंने तुम्हें कहा था शिक्षा पाकर अपने परिवार और समाज की सुंदर परवरिश करनी है पर तुमने ज्ञान को पाकर भी अज्ञानता को खत्म नहीं किया ज्ञान का अर्थ प्रकाश होता है जिससे अज्ञानता का अंधकार खत्म हो जाता है मुक्ति का मार्ग अस्पष्ट नजर आता है पर तुमने यह क्या किया ज्ञान पाकर भी अंधकार में भटक रही हो।
बेटी समझने की कोशिश करो मुझे ज्ञान मिला मैंने उसे खुले रुप में सबको बता रहता ज्ञान बंधककर नहीं रहता। ज्ञान की प्रकृति फैलने की है ज्ञान प्रकाश है अंधेरा नहीं रह सकता। ज्ञान पहचान बताता है किसी भी परिस्थिति को ठीक से समझने के लिए रास्ता देता हैरोहित और रहित का बोध करवाता है ।जब कोई व्यक्ति ज्ञान से सुशोभित होता है। तो वहां मैंने तुम्हें समझाया था की बीमारी का उपचार दवा से होता है , बीमारी के कारण को समझ लेने से इलाज संभव हो जाता है अगर मैं ज्ञान की दहलीज से न गुजरता तो क्या यह सब कर पाता।
मुझ से पूर्व तो यह पाखंडी लोग तुम्हारी परछाई से भी नफरत करते थे तुम्हें नीच और कुलटा कहते थे तुलसीदास जैसे लोग तो तुम्हें ताड़न के अधिकारी कहते थे तुम अज्ञानता में फंसी रहो इसलिए ज्ञान से दूर रखते थे आज तुम्हें शिष्य के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
तुम उनसे नाम लेने जाती हो वह परमात्मा का दूत तुम्हें नाम दान देकर कहता है नाम का सुमिरन करो तुम नाम जपते रहो।
मुक्ति के लिए...........सुख के लिए..........
समृद्धि के लिए......... संतानो के लिए...............
जब वह तुम्हें नाम देता है तब कहता है इसे किसी दूसरे व्यक्ति को बताना बस नाम जपना। चोर चोरी की चीज को छुपाता है । अपराधी अपराध को छुपाता है ।अनैतिक व्यक्ति का अनैतिक कर्म करके उसे छुपाता है । धोखा देने वाला व्यक्ति धोखा देकर सत्य को छुपाता । ज्ञान और सच्चाई कभी नहीं छुपाई जाती विद्वान लोगों ने ज्ञान को खोजा और खुले रुप में बांटा यह सभी आविष्कार विज्ञान व ज्ञान पर खोज किए गए हैं दुनिया में जिसने भी ज्ञान खोजा उसने उसे बांटा पूरी दुनिया का कल्याण किया।

बुद्ध ने ज्ञान को खोजा जनता के कल्याण के लिए सब को बांटा 45 वर्षों तक निरंतर घूम घूम कर ज्ञान बांटते रहे ताकि अनंत लोगों का कल्याण हो सके महान पुरुष और उसी ज्ञान को अन्य लोगों के कल्याण के लिए बांटते हैं मैंने ज्ञान को अर्जित किया देश विदेश के सिद्धांतों से यदि वह सब लोग ज्ञान बांटने का काम नहीं करते तो मैं भी क्या था।
मैंने भी ज्ञान प्राप्ति के बाद सबको ज्ञान मिले , सबको विकास का मार्ग मिले , सभी अपने दुखों को खत्म करके सुखों को उपलब्ध हो इसी का ख्याल करके स्कूलों की व्यवस्था की थी । ज्ञान प्राप्त लोगों को ज्ञान बांटने की जिम्मेदारी सौंपी थी परिणाम देख भी रहा हूं नई नई खोजों ने मानव की तरक्की को गति दी है । फिर इन दाढ़ी वाले बाबाओं की दाढ़ी में कौन सा सत्य छुपा है जिस को बताने से अनर्थ हो जाएगा। यह सच है कि यदि इसे बताएंगे तो अनर्थ हो जाएगा लेकिन किसका जिसने तुम्हें छुपाने के लिए कहा है क्योंकि इसमें कुछ है ही नहीं।
मेरा संविधान तुम्हें आवाज दे रहा है मैं तुम्हें इस देश का शासक देखना चाहता हूं एक महिला शिक्षित होती है तब वह दो परिवारों का भला करती है और यदि महिला अनपढ़ रहती है तो दो परिवार दुख में रहते हैं तुम पर पूरा दायित्व है परिवार को बचाओगी तभी ही समाज बच सकता है इसलिए बुद्ध की शरण में आ जाओ। प्रज्ञा, शील, समाधि का मार्ग तुम्हारी सुरक्षा सुख और समृद्धि का आधार बनेगा। तभी तुम देश की हुक्मरान बन सकती हो यह मेरी मंगल कामना है।

लेखक -उदय कुमार गौतम
(भारतीय मूलनिवासी संगठन के फैज़ाबाद, उ.प्र. जिले के महासचिव है)

Wednesday, 6 September 2017

तुम सवाल से डरते हो,हमें मौत से डर नहीं। तुम बवाल करते हो...

कलमकारों के क़त्ल पर रूह कुरेदती सूरज कुमार बौद्ध की कविता - कलम की आवाज़

देखिये यह वीडियो:-

नरेंद्र दाभोलकर, कलबुर्गी, पनसारे,....... और अब गौरी लंकेश। आए दिन अनेक लेखकों, पत्रकारों, कलमकारों को मौत की घाट उतार दिया गया। इन बेबाक आवाजों का गुनाह सिर्फ इतना है कि ये साम्प्रदायिक मानसिकता एवं फ़ासीवाद के खिलाफ लिखा करते थे। आखिर सवाल से इतनी बौखलाहट? सवाल से इतनी झल्लाहट? जम्हूरियत को बंदूक के नोक पर टिकाए यह शासक वर्ग कब तक पाबंदी लगाएगा? कितनों को मारेगा? जब तक एक भी कलम बचा रहेगा तब तक कलमकारों की बेबाकी यूँ ही जारी रहेगी। आइए पढ़ते हैं सामाजिक क्रांतिकारी चिंतक सूरज कुमार बौद्ध द्वारा लिखी गई इन्ही संवेदनाओं को छूती हुई मार्मिक कविता - कलम की आवाज !

क़लमकारों के कलम की आवाज़
हुक्मरानों के नग्न ज़ुल्मीयत को
बहुत बेबाकी से बयां करती है।
क्या यही वजह है मेरे क़त्ल की ?
तुम सवाल से डरते हो,
हमें मौत से डर नहीं।
तुम बवाल करते हो,
हमें बवाल से डर नहीं।
तुम कहते हो मत बोलो,
हम कहते हैं सच बोलो
क्या यही वजह है इस हलचल की?
क्या यही वजह है मेरे क़त्ल की ?
आंसुओं के समंदर में
कुछ अय्यासी की मीनारें
खड़ी करके हमारी खुशहाली तय करते हो?
औसत से यूँ मेरी बदहाली तय करते हो?
तुम्हारे अच्छे दिन पर हम सवाल कर लिए
क्या यही वजह है इस जलन की?
क्या यही वजह है मेरे क़त्ल की ?
कलम रेह की मिट्टी सी नहीं होती,
जिंदा लाश बन चुप्पी सी नहीं होती,
हम सवाल करते हैं
तुम कत्ल करते हो
जरा बताओ कौन जिंदादिल है,
जरा बताओ कौन बुदजील है।
कुछ सवालों से तिलमिलाकर,
त्रिशूल तलवार उठा लिए?
क्या यही वजह है इस पहल की?
क्या यही वजह है मेरे क़त्ल की ?











- सूरज कुमार बौद्ध,
(रचनाकार भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)

Tuesday, 5 September 2017

भाजपा केवल पाखंडवाद पर टिका हुआ है, देश में अंबेडकरवाद का पताका दिखाई पड़ रहा है

देश को तथाकथित नजरिए से ही सही पर आजाद हुए 70 साल हो चुके हैं लेकिन भारत की बहुसंख्य आबादी आज भी दाने दाने को मोहताज है।

भारत की गिनती आज भी भूखमरी से पीड़ित देशों में होती है। राष्ट्रभक्ति, देशभक्ति, हिंदू धर्म, मुस्लिम धर्म..... सब कुछ ठीक है हमें इससे कोई समस्या नहीं है लेकिन इस बात का जवाब कौन देगा कि आज भी इस देश में करोड़ों की आबादी रात में भूखों सोती है। मुट्ठी भर के लोग अपने धार्मिक व्यवस्था के आड़ में सत्ता पर कब्जा जमाए हुए हैं जो कि आए दिन आम अवाम मजदूर एवं वंचित तबके पर हमला करते रहते हैं। ऐसे में असली लड़ाई इस बात पर निर्भर करती है कि ऐसी कौन सी नीति होगी जब इस देश की आम अवाम एवं वंचित तबके के लोगों की पहुंच दो जुन रोटी तक हो पाएगी।

दरअसल सारी गलती इन सत्ताखोर नेताओं की नहीं है। इन नेताओं को सत्ताखोर बनाने में प्रत्यक्षतः आम आवाम की अंधभक्ति ही होती है। आपको क्या लगता है यह भक्त सिर्फ भक्त हैं। नहीं दरअसल भक्त बनाए जाते हैं  जिनका काम होता है  अपने निरंकुश नेताओं को, निरंकुश शासकों को  सही ठहराना चाहे वह बलात्कारी ही क्यों ना हो। सहारनपुर में अनुसूचित जाति के लोगों के 60 से अधिक घर जला दिए गए, कई लोगों को तलवार से काट कर मौत के घाट उतार दिया गया... तब क्यों सोई हुई थी यह जनता? अखलाक मारा गया, रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या हुई , उना कांड होता है, गोरखपुर में 70 से अधिक बच्चों की हत्या होती है, अनीता को मरने पर मजबूर किया गया...... और कितनी बहनों की हत्या हुई, कितनी बहनों के साथ बलात्कार हुआ पर भारत की जनता खामोश लाश की तरह सोई रही। लेकिन एक बलात्कारी के समर्थन में लाखों जनता सड़क पर उतरकर आतंक का नंगा नाच खेलती है। शर्म आती है मुझे ऐसे भक्तों के घटिया करतूतों पर। हमारी असली लड़ाई इसी रणनीति के खिलाफ होनी चाहिए जो कि भक्त पैदा करते हैं।

अगर मैं ईमानदारी से कहूं तो भाजपा देश का सबसे कमजोर संगठन है क्योंकि भाजपा केवल पाखंडवाद पर टिका हुआ है। जिस दिन हम भाजपा के पाखंड पर हमला कर देंगे उस दिन बहुजन मूलनिवासी समाज के लोग जो कि भाजपा के सांप्रदायिक राजनीति में फंसे हुए हैं वह अपने आप भाजपा से बाहर निकलकर अंबेडकरवाद के रास्ते पर चल पड़ेंगे। आज पूरे देश में अंबेडकरवाद का पताका दिखाई पड़ रहा है। बहुजनों में जय भीम का जोश सर चढ़ कर बोल रहा है। अब जरूरत है इस जोश को पूरे होश के साथ सही लड़ाई से जोड़ने की। पूरे देश में धर्म के आड़ पर अपनी राजनीतिक सत्ता को स्थापित किए हुए लोगों को इस बात का डर अब सताने लगा है कि आने वाला भारत अंबेडकरवादियों का होगा, प्रगतिशील सोच वालों का होगा। सामंतवादी ताकतों को बाबा साहेब अंबेडकर के 'समतामूलक समाज' की तरफ रुख कर लेना चाहिए क्योंकि शोषकों को सत्ता तो छोड़नी पड़ेगी। खैर सभी मूलनिवासियों को क्रांतिकारी जय भीम कहते हुए आखरी लाइन अपनी कविता "अम्बेडकर या गोलवलकर?" से कि- "अब समानता की बात सबको मान लेना चाहिए,
भीम युद्ध की आहट को पहचान लेना चाहिए।"

बहुजन समाज एकजुट हो रहा है। मूलनिवासी संकल्पना को जन स्वीकृति मिल चुकी है। अब बेजुबानों ने बोलना शुरु कर दिया है। सच कहूं  तो मुझे भविष्य का समतामूलक समाज दिखाई दे रहा है...


- सूरज कुमार बौद्ध
(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)

Saturday, 26 August 2017

हिंसा के लिए कोर्ट को जिम्मेदार बताने वाले नेता नगरी अदालत की अवमानना के असली गुनहगार है- सूरज कुमार बौद्ध


सीबीआई की पंचकूला अदालत ने जैसे ही ढोंगी बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह को बलात्कार का अपराधी ठहराया वैसे ही पंजाब और हरियाणा में बलात्कारी बाबा के भक्तों ने कानून अदालत तथा संविधान को ठेंगा दिखाते हुए आतंक का माहौल बना दिया।

 सैकड़ों बसों को जलाकर राख कर दिया गया, आम जनमानस से लेकर पत्रकार बंधुओ तक पर  जानलेवा हमला किया गया, सैकड़ों करोड़ों संपत्ति को तहस-नहस कर आग के हवाले कर दिया गया, 30 से अधिक मासूमों की जाने चली गई है लेकिन इन सब के बावजूद धर्म के आधार पर अपना दुकान चला रहे नेताओं की बेतुकी बयानबाजी इंसानियत के चेहरे पर गहरा तमाचा मारती है।

क्या हिंसा के लिए अदालत भी जिम्मेदार?
तत्कालीन हिंसा प्रकरण में शामिल भक्तों को आधार बनाकर कई नेताओं ने अदालत को खुली चुनौती देते हुए हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया तथा उनकी बयानबाजी एक तरह से अदालत के फैसले को सांप्रदायिक रंग देते हुए नजर आई। भाजपा नेता तथा सांसद साक्षी महाराज भारतीय राजनीति के एक ऐसे ही नेता हैं जो चर्चा में आने के लिए कुछ भी अनाप शनाप बकते रहते हैं। मीडिया भी साक्षी महाराज के बयान को केंद्र बिंदु बनाती है। दरअसल आम आवाम के दुख दर्द से बेखबर इस तरह के नेता लोगों का बयान आता ही इसीलिए है ताकि असली चर्चा के विषय को नजरअंदाज किया जा सके। साक्षी महाराज ने अदालत को गलत ठहराते हुए हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया। बात को आगे बढ़ाते हुए साक्षी महाराज यहां तक नहीं रुके बल्कि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अदालत को भारतीय संस्कृति पर षड्यंत्र रचने का आरोप भी लगाया। आइए जरा साक्षी महाराज के बयान पर एक नजर डालते हैं:
1- एक शिकायतकर्ता सही है या बाबा के करोड़ो भक्त गलत?
2- इस पूरे हिंसा तथा नुकसान के लिए कोर्ट भी जिम्मेदार है।
3- राम रहीम तो सीधे साधे हैं इसलिए कोर्ट ने उनको तो बुला लिया
4- कर्नल पुरोहित के साथ क्या हुआ? प्रज्ञा भारती ठाकुर के साथ क्या हुआ? ये योजना बद्ध तरीके से ये साधु-सन्यासी नहीं, (अदालत का) भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का षडयंत्र है.”
5- एक आदमी यौन शोषण का आरोप लगा रहा है। पूर्वाग्रह भी हो सकता है। कुछ लोभ लालच भी हो सकता है।

क्या अदालती इंसाफ का यह जातिवादी चेहरा है?
अब एक प्रमुख सवाल यह उठता है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय को जस्टिस कर्णन द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे गए 20 जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी एक पत्र से इतनी बोखलाहट हो गई थी कि सर्वोच्च न्यायालय के उन्ही सात जजों की पीठ ने जस्टिस कर्णन के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही करते हुए जस्टिस कर्णन के आरोप को अदालत की अवमानना माना था। लिहाजा जस्टिस करनन को 6 महीने के लिए जेल की सजा हुई। वर्तमान में जस्टिस कर्णन को गिरफ्तार कर जेल के हवाले कर दिया गया है। सांसद ने अदालत को भी हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया लेकिन वही सर्वोच्च न्यायालय, वही उच्च न्यायालय, वही अदालत आज क्यों मौन है? आखिर क्यों? जस्टिस कर्णन प्रकरण पर स्वतः संज्ञान लेने वाली अदालत क्या आज असहाय है एक सांसद पर अदालत की अवमानना नोटिस जारी करने के लिए? आखिर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 तथा अनुच्छेद 215 का सही अनुपालन कब होगा जो कि अदालत की अवमानना करने वालों को दंडित करने की बात करती है। माननीय अदालत को समय रहते इस मसले पर संज्ञान लेना चाहिए वरना इंसाफ का जातिवादी चेहरा मुझे स्पष्ट दिखाई दे रहा है। और आपको…..?

– सूरज कुमार बौद्ध,
(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)

Friday, 25 August 2017

क्या आरक्षण से जातीय संघर्ष उत्पन्न होता है?

आरक्षण से जातीय संघर्ष की बात करने वाले ही अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़ों के सबसे कट्टर एवं खतरनाक दुश्मन है।

क्योंकि वे इन शोषित वर्गों को किसी भी क्षेत्र में स्वयं से ज्यादा बढ़कर नही देखना चाहते है।ऐसे लोगो की छाती पर साँप लोटने लग जाते है,जब किसी शोषित वर्ग को वे उच्च पद पर बैठा देखते है और इन्हें जब उसके सामने उपस्थित होना पड़ता है, क्योंकि ऐसे अवसर पर उनके दिमाग मे वही सड़ा-गला विचार उत्पन्न हो जाता है कि जो व्यक्ति कल तक हमारे पांव की जूती था,आज वह हमारे सामने उच्च पद पर कैसे विराजमान है?
कल तक जो हमारी ठोकरों में लुढकता था,वही आज हमें आदेश कैसे दे रहा है? बस मूल कारण यही है जातीय संघर्ष उत्पन्न होने का।

अन्य कोई कारण नही है, अन्य तमाम बातें तो इनकी कोरी बकवास मात्र है।
आरक्षण का विरोध करने वालो को इस विषय मे एक बात पर स्वयं अच्छी तरह से ठंडे दिलो दिमागों से विचार करने की जरूरत है।
वह यह है कि जब उनकी दृष्टि में आरक्षण का होना अच्छी बात नही है। इसे समाप्त कर देना चाहिए,तो फिर वे स्वयं अपने लिए आरक्षण की मांग क्यों कर रहे है?

दरअसल ऐसे लोग शासन - प्रशासन के उच्च पदों पर अपना ही एकाधिकार करना चाहते है।ऐसे लोगो का एकमात्र दर्द यही है कि शासन - प्रशासन के उच्च पद पर हमारे ही अधिकार में रहे,अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़ों के नही इन पर हुकूमत करने का अधिकार हमारा है, इनका हम पर कतई नही।
हम ही इन पर रुआब झाड़ सकते है। इनका हमारी हाँ में हाँ मिलने के अलावा कोई दूसरा कार्य नही होना चाहिए। इस विकृत मानसिकता वाले लोगो को दोगले भी कहा जाए,तो कोई बुरी बात नही होगी,क्योंकि एक तरफ जिस मुंह से ये आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की बात करते है, उसी मुंह से ये उसे अपने लिए लागू करने की भी बात करते है।


द्वारा-दुर्गेश यादव"गुलशन"
(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष है)।

राम रहीम मामला से जुड़ी हकीकत: आंबेडकरवादियों ने ज़मीन ख़ाली कर दी, बाबाओं ने पकड़ ली


राम रहिम प्रकरण इस समय देश में सबसे चर्चित मामला बनकर उभरा है सोशल मीडिया गरम है पत्रकार एंव समाजिक चिंतक दिलीप मंडल ने फेसबुक पर लिखा है कि "यह डेरों की सफलता नहीं, आंबेडकरवादी-समाजवादी- समतावादी राजनीति की असफलता है।

हरियाणा, पंजाब और साथ लगे राजस्थान का हिस्सा सामाजिक आंदोलनों की दृष्टि से बंजर साबित हुआ है, यह देश में अनुसूचित जाति की सबसे सघन आबादी वाला इलाक़ा है। हर तीसरा आदमी SC है।
यहाँ समाजवादी आंदोलन कभी नहीं पनप सका। मंडलवादी-समतावादी राजनीति से भी यह इलाक़ा अछूता रहा। बीएसपी का यहाँ का उभार भी क्षणिक साबित हुआ। बाक़ी का आंबेडकरवादी आंदोलन भी सीमित ही रहा।

ऐसे में जनता के पास कोई सपना नहीं बचा। कोई भी नहीं था जो बेहतर समाज का सपना दिखाए।
इसी शून्य में नीचे की जातियाँ डेरों की शरण में चली गई। यहाँ का भाग्यवाद उन्हें सुकून देता है। साथ बैठकर प्रवचन सुनना ही इनका एंपावरमेंट है।

कोई ब्राह्मण तो डेरों में जाता नहीं है। उनका तो अपना मंदिर है। डेरा नीची की जातियों के लोगों के लिए हैं। हालाँकि कोई भी बाबा नीचे की जातियों का नहीं है। ये बाबा चुनाव के समय जनता को इस या उस पार्टी को बेच देते हैं।
जनता के पास विकल्प क्या था? जिसने विकल्प दिया, लोग उसके पास चले गए।
आंबेडकरवादियों ने ज़मीन ख़ाली कर दी, बाबाओं ने पकड़ ली। जनता के पास आंबेडकरवादी विकल्प था कहाँ?
इसलिए डेरा भक्तों को दोष मत दीजिए।
यह समाजवादी-आंबेडकरवादी राजनीति की असफलता का साइड इफ़ेक्ट है।

समाजवादी-आंबेडकरवादी सपनों के बिना समाज का डेरा बन जाता है।

वहाँ ऐसे लोग राज करते हैं।"

Sunday, 20 August 2017

मुझे मार सकते हो, मेरी विचारधारा को नहीं - श्रेयत बौद्ध


हम बुद्ध, फुले, पेरियार, बिरसा और अम्बेडकर की जय बोलते हैं तो इन्हें बुरा लगता हैं।

क्योंकि हम उन महापुरुषों का सम्मान करते हैं जिन्होंने मनुवाद को जड़ से हिला दिया था, इनके षड्यंत्र की पोल खोल दी थी।

हम इनके झूठे आदर्शो को चुनौती दे रहे हैं हम विद्या की देवी उसे मान रहे हैं जिस फुले दम्पत्ति ने देश का हर वर्ग के लिए पहला विद्यालय खुलवाया था और माँ सावित्रीफुले ने घोर अपमान के बावजूद विधवा स्त्रियों , अछूत कहे जाने वाले बालक बालिकाओ के लिए शिक्षा की क्रांति की उसे सम्मान देते हैं।

तो इन्हें सच से डर लग रहा है क्योंकि झूठ का पर्दाफाश हो रहा है, तभी तो IIT madras में अम्बेडकर - पेरियार स्ट्डी सर्कल पर केंद्रीय मंत्री के हस्तक्षेप पर बेन लगा दिया जाता है और रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या कर दी जाती हैं।

अब नया और रौंगटे खड़ा कर देने वाला समाचार आया है हमारे अम्बेडकरवादी युवा पर जानलेवा हमला हुआ है वह खून से लतपथ है किंतु उनके जज्बे को सलाम उन्होंने अपने फसेबूक पर लिखा है कि..

 " मुझे मार सकते हो, मेरी विचारधारा को नहीं।
मौत भी आ जाये पर बाबासाहेब की विचारधारा की लड़ाई लड़ना नहीं छोडूंगा।

फुले-अंबेडकरी विचारधारा की बात करने पर मनुवादियों द्वारा मेरे ऊपर जानलेवा हमला कराया गया है।

जय भीम..!!

हूल जोहार..!!"


 Shreyat Bouddh

Thursday, 17 August 2017

बुद्ध की मूर्ति पर गोबर फेकने के विरोध में कटँगी बंद..


कटँगी | बालाघाट मुख्यालय से 2 कि मी दूर स्थिति नागार्जुन परिसर जहाँ प्रतिवर्ष विशाल बौद्ध महा सम्मेलन धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाता है।


प्रतिवर्ष लाखों की तादाद में अनुयायी शरीक होते है!विशाल परिसर होने पर लंका से तथागत बुद्ध के अस्थि कलश बौद्ध भिझु लेकर आये थे उक्त स्थल बौद्ध अनुयायीओ के श्रद्धा का स्थल है जहाँ तथागत बुद्ध की मूर्ति स्थापित है, असामाजिक तत्वों के द्रारा तथागत बुद्ध की मूर्ति पर गोबर फेककर अपमानित करने का कृत्य किया गया जिससे बुद्ध - अम्बेडकर अनुयायियों में काफी रोष व्याप्त है।


अधिवक्ता संजय खोब्रागडे के द्रारा लिखित शिकायत किये जाने पर थाना प्रभारी कटंगी के द्रारा अज्ञात लोगों के विरुद्ध धारा 153A 295A IPC के तहत दिनांक 10-8-2017 को अपराध दर्ज किया गया।

किन्तु पुलिस विभाग के द्रारा आरोपियों को पकड़ने में हाला हिवाला किये जाने पर बौद्ध अनुयायीओ में रोष व्याप्त है, बुध्द - अम्बेडकर अनुयायियों ने आहूत बैठक में बुद्ध अम्बेडकर संघर्ष समिति कटंगी का गठन किया गया, जिसमें अधिवक्ता संजय खोब्रागडे, ओमदास मेश्राम, प्रशांत मेश्राम, सुरेंद्र गजभिये, प्रशांत हुमनेकर(पार्षद), कपिल नागदेवे और भीम प्रकाश मेश्राम इत्यादि के नेतृत्व में 20 अगस्त को कटंगी बन्द का आव्हान किया गया हैं।

अधिवक्ता संजय खोबरागड़े ने आह्वान किया है कि सभी बुद्ध - अम्बेडकरवादी अधिक से अधिक तादाद में उपस्थित होकर बन्द धरना प्रर्दशन को सफल बनायें।

उक्त आंदोलन बुद्ध अम्बेडकर संघर्ष समिति कटंगी बालाघाट (म. प्र) एंव वी लव बाबासाहेब सोशल सोसायटी के सयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न होगा जिसमें जिले भर के सभी अम्बेडकरवादी संगठनों की उपस्थिति होगी सभी संगठन एक मंच पर आकर अपनी एकता का परिचय भी देंगे।

Wednesday, 16 August 2017

सोनू सॉंग से मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह पर हमला

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लांच किया इंदौर कांग्रेस आईटी सेल का वीडियो गीत.....

इंदौर कांग्रेस आईटी सेल द्वारा बनाये गए वीडियो गीत "एमपी तूने शिवराज पर भरोसा क्यों किया"  को इंदौर रेसीडेंसी कोठी में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लांच किया। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कांग्रेस उपाध्यक्ष  तुलसी सिलावट, डॉ. धर्मेंद्र बाजपेयी भी उपस्थित थे।


वीडियो गीत इंदौर कांग्रेस आईटी सेल के शहर अध्यक्ष विपिन गंगवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने तैयार किया। वीडियो में जयदेव मालवीय, किशोर धुलधोए, सुमित सेठी, सुयश बाकलीवाल, भास्कर जोशी, सुनील प्रजापत, राहुल त्रिपाठी, राहुल राजपुरोहित, राहुल राजोरे, मोहित अग्रवाल, संजू राठौर, आशय गंगवाल ने अपनी भूमिका अदा की।

इस अवसर पर इंदौर आईटी सेल के राकेश परिहार, महेंद्र पांडेय, बलराम चंद्रवंशी, नितीश मिश्रा, पवन तंवर, चिराग गोधा, अमित चौहान, रवि सहगल भी उपस्थित थे।

Sunday, 30 July 2017

हमारे भारत में भ्रष्ट नेताओं, अभिनेताओं और जजों को सजा नहीं होती- सूरज कुमार बौद्ध

अन्याय पर टिकी हुई न्याय व्यवस्था

पाकिस्तान की सर्वोच्च न्यायपालिका द्वारा तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री (वजीर-ए-आजम) रहे नवाज शरीफ को अयोग्य करार दिया जाना पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अदालती निष्पक्षता की दृष्टि से एक मिसाल है। अमूमन पाकिस्तान की लोक वितरण प्रणाली तथा सरकारी संस्थाएं अंतर्राष्ट्रीय पारदर्शिता की मानक में बहुत पीछे होते हैं। पिछले शुक्रवार को पाकिस्तान की सर्वोच्च न्यायालय की पांच जजों की खंडपीठ ने बंद कोर्ट रूम से अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के जज एजाज अफजल अपने आदेश में कहते हैं कि "मियां नवाज शरीफ अपने घोषित आय का झूठा विवरण दिए हैं। नवाज शरीफ संसद के एक ईमानदार सदस्य बने रहने के लायक नहीं है। इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री पद पर बने रहने से अयोग्य करार दिया जाता है।"

सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले का पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया ने किया स्वागत

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस ऐतिहासिक फैसले को सुनाए जाने पर पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में क्रिया प्रतिक्रिया का दौर चल पड़ता है। पूर्व क्रिकेटर तथा वर्तमान में विपक्ष विपक्षी नेता इमरान खान कहते हैं कि "अदालत के इस फैसले से पाकिस्तान की जीत हुई है। आमतौर पर मुल्क में दो तरह के कायदे हैं, एक कमजोर व गरीब के लिए और दूसरा ताकतवर व अमीर के लिए। लेकिन अदालत के इस फैसले ने इस परिपाटी को तोड़ दिया है।" पाकिस्तान की अवाम उत्साह से लबरेज है। स्वयं नवाज शरीफ के समर्थक भी इस ऐतिहासिक फैसले से आश्चर्यचकित हैं। नवाज शरीफ अपने पद से इस्तीफा दे दिए हैं लेकिन वह अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को अभी भी नकार रहे हैं। फिलहाल नवाज शरीफ कुछ भी कहें लेकिन पाकिस्तान के सर्वोच्च अदालत के इस फैसले से उनका राजनीतिक भविष्य समाप्त हो चुका है।

क्या है पनामा पेपर्स लीक मामला?
ज्ञातव्य है कि पनामा पेपर्स पनामा की कंपनी मोसेक फोनसेका द्वारा इकट्ठा किया हुआ 1 करोड़ 15 लाख गुप्त फाइलों का भंडार है। इनमें कुल 2,14,000 कंपनियों से सम्बन्धित जानकारियां है। इसमें उस कंपनी के निर्देशक आदि की जानकारी भी है। पिछले साल मई 2016 में पनामा पेपर्स लीक की खबर पूरी दुनिया में तहलका मचा देती है। अमेरिका स्थित खोजी पत्रकारों की अन्तराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल कॉन्सोर्टियम ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के नेतृत्व में दुनिया के 78 देशों के 107 मीडिया संस्थानों के 350 से ज्यादा पत्रकारों ने पनामा पेपर्स मामले से जुड़े दस्तावेजों का एक साल तक अध्ययन किया। उसके बाद यह खुलासा हुआ। आईसीआईजे को किसी अज्ञात सूत्र ने इन दस्‍तावेजों को उपलब्‍ध कराया था।

भारत सहित दुनिया की अनेक हस्तियां कटघरे में...
पनामा पेपर्स खुलासे में करीब 450 भारतीय फ़िल्मी हस्तियों, उद्योगपतियों तथा नेताओं का भी नाम सामने आया है जिन्होंने टैक्स चोरी और काला धन सफेद करने के लिए टैक्स हैवन माने जाने वाले देशों में धन का निवेश किया। इनमें से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह, अमिताभ बच्चन और उनकी बहू ऐश्वर्या राय बच्चन, अजय देवगन, डीएलफ के मालिक केपी सिंह, गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी जैसे बहुतों नाम शामिल हैं। विदेशों में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के करीबियों, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (दोषी करार), मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक, सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद, पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेनजीर भुट्टो, लीबिया के पूर्व शासक कर्नल गद्दाफी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के परिवार समेत कई हस्तियों के नाम हैं।

भारत में पनामा पेपर्स के आरोपी बनें सरकारी ब्रांड एंबेसडर

भारत दुनिया का एक अजूबा देश है। यहां पर चोर लुटेरे और बेईमान नेताओं को सजा नहीं होती है। कानून की पेचीदगियों में गुल्ली डंडा खेलते हुए भारत की न्याय व्यवस्था जातिवाद के समंदर में गोते लगाते हुए नजर आती है।  जिस पनामा पेपर्स लीक मामले में पाकिस्तानी अदालत ने पाकिस्तानी वजीरे आजम तक को नहीं बख्शा उसी पनामा पेपर्स खुलासे में शामिल भारतीय हस्तियाँ मौजमस्ती की जिंदगी जी रहे हैं। हद तो तब हो जाती है जब पनामा पेपर्स खुलासे में नामित टैक्स चोर आरोपी को सरकारी योजनाओं का ब्रांड अंबेसडर बनाया जाता है। अगर पनामा पेपर्स लीक में मायावती या लालू प्रसाद यादव का नाम होता तो यह बिकाऊ मीडिया सुबह शाम नैतिकता की राग अलापती रहती। लेकिन अडानी, अमिताभ, रमन सिंह, अजय देवगन जैसों पर खामोश है।

पाकिस्तानी अदालत का फैसला भारतीय न्यायपालिका के लिए एक सीख।
मैं पाकिस्तानी अदालत के निष्पक्षता को सलाम करता हूं। भारत में अदालतों में पंडित पुरोहित लोग बैठे हैं। भारत के जज "मोर सेक्स नहीं करते" का पाठ पढ़ाते हैं। यहां पर बलात्कारी सरेआम घूमते हैं लेकिन आंदोलनकारियों को तुरंत जेल में डाल दिया जाता है। यहां स्वघोषित ऊंची जाति की लड़की तथा  नीचे जाति के लड़के प्यार किए जाने पर  उनकी हत्या कर दी जाती है। प्रेमी जोड़ों को सरेआम नंगा घुमाया जाता है पर कुछ नहीं होता है। यहां भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े हुए जज को जातीय मानसिकता से ग्रस्त जजों द्वारा अदालत की अवमानना का दोषी करार देकर जेल में डाल दिया जाता है लेकिन ओपी मिश्रा जैसे रिश्वतखोर सवर्ण जजों को कोई सजा नहीं होती है। रोहित वेमुला के हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं, सहारनपुर के असली दंगाई खुलेआम घूम रहे हैं। अखलाख और पहलु खान के हत्यारों का कानून कुछ नहीं कर पा रही है। ऊना उत्पीड़न कांड के पीड़ित आज भी इन्साफ को तरस रहे हैं। हाल में ही एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें भीड़ प्रेमी जोड़े को नंगा करके ढ़ोल नगाड़े बजाते हुए सड़क पर घुमा रही है। मीडिया ऐसे खबरें दिखाने की जरूरत नहीं समझती है। हम नेताओं को क्या कहें भारत में न्यायाधीश भी जांच प्रक्रिया से भागते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायपालिका यह मानकर बैठी है कि सवर्ण न्यायाधीश कभी अपराधी नहीं हो सकते हैं। खैर श्रृंखला बहुत लंबी है। सच्चाई पर किसी देश का एकाधिकार नहीं होता है। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रधानमंत्री को अयोग्य करार देना सच में एक ऐतिहासिक फैसला है। हमारे भारत में भ्रष्ट नेताओं, अभिनेताओं और जजों को सजा नहीं होती है। काश भारत की न्यायपालिका पाकिस्तान से कुछ सीख पाती !
द्वारा- सूरज कुमार बौद्ध
(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)


Thursday, 27 July 2017

हिंदू मुस्लिम कर-करके दंगा कराने वालों, यहां पर खूब शांति है, बहरे नहीं हैं हम

सत्ता की सफारी पर सवार होकर जब कोई  तानाशाह शासक सच पर पाबंदी लगाता है तो उसके विरोध में जज्बाती चेहरों का सामने आ जाना तय हो जाता है क्योंकि जब भी किसी को हद से ज्यादा डराया जाता है तो उसके दिल में डर खत्म हो जाता है।

ऐसे ही एक क्रांतिकारी चेहरे का नाम रोहित वेमुला था जिसकी संस्थानिक हत्या कर दी गई। चूंकि रोहित वेमुला को आत्महत्या तक ले जाने में मजबूर करने में आंध्र प्रदेश के विधायक, हैदराबाद विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर तथा केंद्रीय मंत्री तक का नाम आया था इसलिए रोहित वेमुला द्वारा आत्महत्या किए जाने की निष्पक्ष जांच ना होकर जांच इस बात पर सिमटती हुई नजर आई की रोहित वेमुला दलित था या नहीं। हुकूमत द्वारा आम अवाम पर आए दिन ढाए जा रहे ज़ुल्म और ज़्यादती के खिलाफ बने आंदोलन के प्रतीक रोहित वेमुला को समर्पित करते हुए पढ़िए सामाजिक क्रांतिकारी चिंतक सूरज कुमार बौद्ध की रचना "अभी मरे नहीं हैं हम"....


      "अभी मरे नहीं हैं हम"
उनसे कह दो कि अभी डरे नहीं है हम,
हारे हैं जरूर मगर मरे नहीं हैं हम।

बहुत जुनून है मुझमें इस नाइंसाफी के खिलाफ,
सर फिरा है मगर सरफिरे नहीं हैं हम...

बड़ी ऊंची पहाड़ है, है फ़तह बहुत मुश्किल, अभी से हार क्यों माने अगर चढ़े नहीं हैं हम।

तेरे भड़काने से फिरकापरस्त हो जाएं?
तुम्हारी तरह ज़मीर से गिरे नहीं हैं हम।

हिंदू मुस्लिम कर-करके दंगा कराने वालों,
यहां पर खूब शांति है, बहरे नहीं हैं हम।

तेरी सियासत ही मुल्क का माहौल बिगाड़ रहा,
पर हमारी जंग जारी है अभी ठहरे नहीं है हम।

दो कौड़ी के दाम से मेरा जमीर मत खरीदो,
अमानत में खयानत कर बिके नहीं हैं हम।

जम्हूरियत में तानाशाही की चोट ठीक नहीं,
कल भी इंकलाबी थे, अभी सुधरे नहीं हैं हम।

एक रोहित के मौत से हमे खामोश मत समझो,
अब हजार रोहित निखरेंगे बिखरे नहीं हैं हम।

उनसे कह दो कि अभी डरे नहीं है हम,
हारे हैं जरूर मगर मरे नहीं हैं हम।

द्वारा- सूरज कुमार बौद्ध
(रचनाकार भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)


Monday, 24 July 2017

बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर का अपमान मत करो: इं0 डी0 प्रकाश गौतम

जैसा कि सभी जानते हैं कि बाबा साहेब डॉo भीमराव आंबेडकर विश्वरत्न है। बाबा साहेब डॉ० आंबेडकर पूरी दुनिया में अपने त्याग, समर्पण, मानवतावादी दृष्टिकोण, शोषितों के मसीहा, शिक्षा, संगठन और संघर्ष की बदौलत जाने जाते हैं। सर्वविदित है कि बाबा साहेब डॉ0 भीमराव आंबेडकर से बड़ा विद्धवान अभी तक भारत में कोई पैदा नही हुआ है। देश के गरीब, शोषित, वंचित तथा उपेक्षित समाज के प्रति उनके त्याग को कभी भुलाया नहीं जा सकता। संपूर्ण देश तथा समाज के प्रति उनके जैसा कोई बलिदानी और त्यागी भी भारत में अभी तक पैदा नही हो सका है। बाबा साहेब ने जीवन पर्यंत मनुवादियों का अपमान सहन किया और गरीबी भी सहन की, किन्तु उन्होंने अपना आत्मसम्मान कभी किसी के हाथो बिकने नही दिया। उनके जैसा आत्मसम्मान पाने वाला व्यक्ति भारत में आज तक पैदा नही हो सका है। कौन नही जानता कि बाबा साहेब के उपकारों की बदौलत आज:


1-देश के करोड़ों लोगों को छुआछूत से छुटकारा मिल गया
2-देश के करोड़ों लोगों की गरीबी दूर हो गई।
3-देश की करोड़ों महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिल गया।
4-देश के करोड़ों लोग अधिकारी-कर्मचारी, डॉक्टर, इंजीनियर्स, वकील, जज  आदि बन गए।
5-देश के लाखों गरीब लोग व्यापारी बन गये।
6-देश के लाखों लोग विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और गृह मंत्री तक बन गए।
7-देश के लाखो लोग ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष, पार्षद, प्रधान, प्रमुख और मेयर बन गए। 
8-अनुसूचित जाति -जनजाति और पिछड़े समाज के अनेकों लोग राज्यपाल, राजदूत, न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीश तक बन गए। 
9-अनुसूचित जाति , जनजाति और पिछड़े समाज से देश के सर्वोच्च नागरिक अर्थात राष्ट्र्पति तक बन गए।  
10-लाखों लोग अरबपति और करोड़ों लोग करोड़पति बन गए।

उपरोक्त के अलावा देश में :-
1- बाबा साहब डॉ० अंबेडकर द्वारा इंटर्न कमीशन के समक्ष प्रस्तुत किए गए विचारों के आधार पर रिजर्व बैंक की स्थापना हुई।
2-भाखड़ा नांगल बाँध एवं दामोदर घाटी जैसी अनेकों सिंचाई परियोजनाओं का संचालन हुआ।
3-बिजली उत्पादन और थर्मल पावर की समस्याओं का विश्लेषण करने, बिजली प्रणाली के विकास तथा पनबिजली सर्वेक्षण के लिए "केंद्रीय तकनीकी विद्युत बोर्ड" (CTPB) के माध्यम से ग्रिड सिस्टम को स्थापित कराया गया।
4-देश की सभी महिला कार्मिको को प्रसूति अवकाश का अधिकार तथा महिला और बाल श्रम संरक्षण अधिनियम (महिलाओं के श्रम बिल के लिए) पारित कराया गया।
5-मजदूरो को 14-16 घंटे के स्थान पर 8 घंटे काम लेने की व्यवस्था तथा श्रमिकों एवं कर्मचारियों के कल्याण के लिए महंगाई भत्ता (डीए) और श्रम कल्याण कोष की स्थापना कराई गई।
6-भारतीय सांख्यिकी कानून: 1942 में भारतीय सांख्यिकी अधिनियम पारित कराया गया।
7-कर्मचारियों को काम करने के दौरान शारीरिक रूप से विकलांगता, चिकित्सा देखभाल, चिकित्सा अवकाश से सम्बंधित क्षतिपूर्ति के लिए कर्मचारी राज्य बीमा(ईएसआई) की स्थापना कराई गई।
8- मार्च 1944 में केन्द्रीय जल सिंचाई और नेविगेशन आयोग (CWINC) की स्थापना की।
9- द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत पुनर्निर्माण समिति की स्थापना करके बाबा साहेब डॉ० आंबेडकर द्वारा देश में कृषि, उद्योग तथा आर्थिक सुधार पर जोर दिया गया।
10- बाबा साहेब डॉ० अंबेडकर ने संसद में हिंदू कोड बिल पेश करके महिलाओं के सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई लड़ी ! जो आगे चलकर हिन्दू कानून का रूप धारण किया ! जिससे महिलाओं को बराबरी का हक़ मिला।
11- बाबा साहब डॉ० भीमराव अंबेडकर के अथक प्रयासों की बदौलत ही भारत में राष्ट्रीय रोजगार एजेंसी की स्थापना हो पाई।
12- अंततः सबसे बड़ा योगदान यह कि भारतीय संविधान की रचना करके बाबा साहब डॉ० भीमराव अंबेडकर ने देश के सभी नागरिकों में समता, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को स्थापित किया।

उपरोक्त के आलावा देशहित में अनेकों काम बाबा साहेब डॉ0 भीमराव अंबेडकर द्वारा किये गए है।
क्या ऐसा और इतना महान कार्य देश के किसी भी व्यक्ति द्वारा किया गया?
इसका सिर्फ एक ही उत्तर है-नहीं।
किसी खास नेता या व्यक्ति ने किसी सामान्य व्यक्ति के लिए कुछ खास भला अवश्य किया हुआ संभव हो सकता है, जिस कारण वह व्यक्ति भला करने वाले उस खास व्यक्ति या नेता का अनुयाई या भक्त या अंधभक्त हो सकता है। वह व्यक्ति उस भला करने वाले के कार्यो का गुणगान भी कर सकता है, उसके चरित्र का भी गुणगान कर सकता है, उसमे हमें कोई आपत्ति नही है।
कोई खास व्यक्ति या नेता बाबा साहेब डॉ० आंबेडकर के बाद अनेको सामाजिक कार्य या देश हित में किये गये कार्य करने वाला भी हो सकता है, उसके अनुयाई, या भक्त या अंधभक्त उसका भी गुणगान कर सकते हैं, उसके चरित्र का भी गुणगान कर सकते हैं, उसमे भी हमे कोई आपत्ति नहीं है। किन्तु बाबा साहेब डॉ0 भीमराव अंबेडकर द्वारा किये गए उपरोक्त महान कार्यों के के बराबर देश के किसी भी व्यक्ति द्वारा आज तक कार्य नहीं किये गए है। इसी के मद्देनजर बाबा साहेब की तुलना किसी भी व्यक्ति से करना बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर का घोर अपमान है। बाबा साहेब के अनुयाइयो व किसी भी खास व्यक्ति या महिला या नेता के अनुयायियों या भक्तों या अंधभक्तो से मेरा हाथ जोड़कर अनुरोध है कि वे बिना सोचें समझे जल्दबाजी या भावुकता में बाबा साहेब की तुलना भारत के किसी भी व्यक्ति या महिला से कदापि न करें।
कृपया बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर द्वारा किये गए त्याग और बलिदान तथा उनके द्वारा किये गए महानतम कार्यों का पूर्णतः सम्मान करे।
हमें गर्व है कि हम दुनिया के उस महानतम युगपुरुष, मनुवादियों से लड़कर देश के सभी गरीबो और महिलाओ को अधिकार दिलाने वाले महानतम योद्धा, पूरी दुनिया में ज्ञान के प्रतीक, भारतीय संविधान के निर्माता, विश्व रत्न, बोधिसत्व, बाबा साहेब डॉ० भीमराव आंबेडकर के अनुयायी हैं और वे ही हमारे मार्गदर्शक और प्रेरणाश्रोत हैं।



द्वारा- इं० डी० प्रकाश गौतम 
(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)



Thursday, 20 July 2017

निर्वाचन कार्ड एवं ईवीएम को आधार कार्ड से लिंक करने की जरूरत

राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। श्री रामनाथ कोविंद जी भारत के अगले राष्ट्रपति होंगे। मैं कुछ आगे लिखूं इससे पहले श्री रामनाथ कोविंद को भारत के राष्ट्रपति चुने  जाने पर मेरा हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं।
राष्ट्रपति चुनाव एवं बैलेट पेपर का इस्तेमाल
राष्ट्रपति चुनाव में जनप्रतिनिधियों द्वारा बैलेट पेपर का इस्तेमाल किए जाने पर सोशल मीडिया में एक बार फिर से ईवीएम मशीन के खिलाफ बहस उठ खड़ा हुआ है। इन दिनों ईवीएम मशीन के खिलाफ धीरे धीरे पुनः नए आंदोलन की शुरुआत हो रही है। ईवीएम मशीन के खिलाफ उठ रहे सवालों के पीछे वाजिब तर्क भी है। दुनिया के बहुत सारे विकसित देश ईवीएम मशीन का इस्तेमाल नहीं करते हैं क्योंकि इसे हैक किया जा सकता है। ईवीएम मशीन के खिलाफ बहुत सारे समाज सुधारकों तथा सामाजिक चिंतकों ने भी आवाज उठाई हैं। विपक्षी दल के अनेक राजनेताओं ने भी चुनाव प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे ईवीएम मशीन पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी तथा मायावती द्वारा पिछले विधानसभा चुनाव में किए गए ईवीएम घोटाले संबंधी आरोप का समर्थन किया था। यह लोकतंत्र के लिहाज से बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनेता लोग जनता को विधायक और सांसद चुनने के लिए अपारदर्शिता का प्रतीक ईवीएम मशीन का इस्तेमाल करने पर मजबूर करते हैं और खुद राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को चुनते वक्त बैलेट पेपर का इस्तेमाल करते हैं। यकीनन यह एक सोची समझी साजिश है।
ईवीएम मशीन के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत
गौरतलब है कि मार्च महीने में आए पांच विधानसभा चुनावों ( उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा) के परिणाम ने पूरे देश को आश्चर्यचकित कर दिया। भाजपा को उत्तर प्रदेश में 325 सीट तथा उत्तराखंड में 57 सीट और कांग्रेस मणिपुर में 28 सीट, गोवा 17 सीट तथा पंजाब में 77 सीट जीतकर बहुमत दर्ज करती है। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी समाजवादी पार्टी 54 सीट और जीत की प्रमुख दावेदार बहुजन समाज पार्टी 19 सीटों पर अपने जीत दर्ज कर सिमट गई। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी चुनाव के नतीजे को पूर्व निर्धारित तथा ईवीएम की जीत बताईं। इसके साथ भाजपा तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला चैलेंज देते हुए कहती हैं कि अगर उनमें थोड़ी सी पारदर्शिता और हिम्मत है तो बैलेट पेपर से पुनः चुनाव कराएं। निर्वाचन आयोग मायावती के आरोप को बिना किसी जांच पड़ताल के तुरंत नकारते हुए कहता है कि ईवीएम मशीन में कोई धांधली नहीं हुई है। मायावती द्वारा ईवीएम मशीन में धांधली किए जाने सम्बन्धी बयान के बाद पूरे देश में ईवीएम मशीन के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन में तेजी आ जाती है। जहां-जहां वीवीपीएटी मशीन का इस्तेमाल किया गया था  वहां अधिकांश जगह भाजपा बुरी तरह से हारी हुई थी। आज भी भारत की बहुसंख्य आबादी चुनाव नतीजे को ईवीएम की जीत मानती है।
निर्वाचन कार्ड एवं ईवीएम को आधार कार्ड से लिंक करने की जरूरत
सरकार द्वारा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना के तहत पब्लिक सब्सिडी और अन्य लाभकारी योजनाओं को आधार कार्ड से जोड़ने का फैसला लिया गया है। LPG स्कीम, मनरेगा की मजदूरी, छात्रवृत्ति कन्या मदद योजना आदि सभी को आधार कार्ड से जोड़ते हुए आधार संख्या को बैंक अकाउंट से लिंक करने को अनिवार्य कर दिया गया है। बिजली बिल, पानी बिल, राशन कार्ड, पैन कार्ड आदि सभी आवश्यक दस्तावेजों को आधार संख्या से लिंक किया जा रहा है। नवंबर 2014 से सूचना तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सिम कार्ड को भी आधार संख्या से लिंक संबंधित नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। मई 2015 में विदेश मंत्रालय यह सूचना जारी की थी कि सभी नागरिकों द्वारा पासपोर्ट को आधार संख्या से लिंक कराना जरूरी है। वर्तमान में आधार संख्या को प्रोविडेंट फंड से भी जोड़ना अनिवार्य कर दिया गया है। अब असली सवाल यह है कि आखिर चुनाव प्रक्रिया में धांधली को रोकने के लिए निर्वाचन कार्ड तथा ईवीएम मशीन को मतदाताओं के आधार संख्या से लिंक करने के लिए सरकार कोई कदम क्यों नहीं उठा रही है? आए दिन फर्जी वोट एवं फर्जी वोटर पकड़े जाते रहते हैं। कई कई जगह तो मरे हुए व्यक्ति के नाम से भी लंबे समय से वोट दिए जाते रहते हैं। आधार कार्ड का ईवीएम से जुड़ जाने पर वोटों की वैधता अंगूठे की छाप के मिलान के बाद ही होगा। इस तरह से फर्जी वोट तथा चुनाव में धांधली का झमेला ही खत्म हो जाएगा। इस संदर्भ में 3 मार्च 2015 को निर्वाचन आयोग ने नेशनल इलेक्टोरल रोल प्यूरिफिकेशन ऑथेंटिकेशन प्रोग्राम (NERPAP) के तहत रजिस्टर्ड मतदाताओं के फोटो को आधार संख्या से लिंक करने पर जोर दिया था। लेकिन उसके बाद सरकार तथा निर्वाचन आयोग दोनों ने इस महत्वपूर्ण कदम को आगे बढ़ाना उचित नहीं समझा। अब केंद्र सरकार तथा निर्वाचन आयोग की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराकर संवैधानिक मूल्यों में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए इस महत्वपूर्ण तथा पारदर्शी विकल्प पर विचार करके सकारात्मक निर्णय ले ताकि जनता का विश्वास स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव में बना रहे वरना चुनाव महज एक खेल बनकर रह जाएगा।

द्वारा-सूरज कुमार बौद्ध,
(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)


Friday, 14 July 2017

अंबेडकर या गोलवलकर दो विचारधारा है, तुम किसे चुनोगे

अगर मानव अधिकारों के उल्लंघन को एक आधार मानकर देखा जाए तो भारत की पहचान एक जातीय हिंसा और उत्पीड़नकारी देश के रुप में की जाती है।

यहां प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक, पंचायत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक हर जगह जातिवाद समाहित है। यह जातिवाद का दंश ही है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के अनेकों एकलव्यों की मौत यहां के ब्राह्मणवादी द्रोणाचार्यों के जातिवादी रवैए की वजह से हुई है। ऐसे में द्रोणाचार्यों के जातिवादी मानसिकता को नकार कर आगे की लड़ाई लड़ने की जरूरत है।

बहुजन समाज के योद्धाओं ! अगर अब नहीं लड़े तो आने वाली नस्लें धिक्कारेंगी हम पर, अपने आप को अकेला मत समझो हम तुम्हारे साथ हैं। मानसिकता उत्पीड़न और लांछन को झेल रहे साथियों के हताश चेतना को अपने क्रांतिकारी शब्दों से क्रांति की रुख का आह्वान करती हुई सामाजिक क्रांतिकारी चिंतक सूरज कुमार बौद्ध की कविता: हम बढ़ते चलेंगे।

        हम बढ़ते चलेंगे...
तुम कदम तो बढ़ाओ हम बढ़ते चलेंगे।
गिरते ही सही संभालते ही सही
लड़ते ही सही लड़खड़ाते ही सही
लेकिन कभी भी रुकेंगे नहीं,
मिशन का कारवां हमारे हाथ है
लिहाजा कभी भी झुकेंगे नहीं।
लाख मुश्किल गर आए हम लड़ते चलेंगे,
तुम कदम तो बढ़ाओ हम बढ़ते चलेंगे...

चलो माना कि बहुत मुश्किल डगर है,
हम क्रांतिकारियों को किसका डर है?
वोट तक सिमट गयी हम मज़लूमों की जिंदगी,
और कब तक करोगे उनके सामने बन्दगी?
अगर पोगा पंडितों का खून है उनमें,
मत भूलना उधम सिंह का जुनून है मुझमें।
अंबेडकर या गोलवलकर दो विचारधारा है,
तुम किसे चुनोगे फैसला तुम्हारा है।
अब समानता की बात सबको मान लेना चाहिए,
'भीम युग' के आहट को पहचान लेना चाहिए।
सब को शिक्षित, संगठित कर हम संघर्ष करेंगे।
तुम कदम तो बढ़ाओ हम चढ़ते चलेंगे।।
द्वारा- सूरज कुमार बौद्ध,
( रचनाकार भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)


Wednesday, 12 July 2017

BJP को रगड़-रगड़ कर तबियत से जो धोया उसी पीड़ा का मोदी जी हमसे बदला ले रहे है

आज लालूप्रसाद यादव के पुत्र और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बीजेपी और पीएम मोदी पर फसेबूक पेज पर निशाना साधा और लिखा कि "मुझे उस झूठे मुक़दमे में फँसाया जा रहा है जब मेरी उम्र 14 साल थी।उस वक़्त मेरी दाढ़ी-मूँछ भी नहीं आयी थी। 14साल का बच्चा घोटाला कर सकता है क्या? कार्यभार संभालने के पहले दिन ही मैंने स्पष्ट कर दिया था भ्रष्टाचार पर मेरी जीरो टॉलरेंस नीति है।मै किसी प्रकार का भ्रष्टाचार सहन नही करूँगा


शुरू से मैंने ईमानदारी,निष्ठा,लग्न और समर्पण की भावना से काम से किया है। क्या पिछड़े वर्ग से आने के कारण ही मुझे मोदी सजा दिलवा रहे है? पहले BJP लालू प्रसाद जी से डरती थी।अब मुझसे डरती है।हम चुप नहीं बैठेंगे,जनता के बीच उतकर इनके भ्रमजाल और अहंकार को तोड़कर करारा जवाब देंगे। आप हमारे डेढ़-दो साल के कार्यकाल को देखें, कोई उंगली नहीं उठा सकता है कि हमने कोई गलत काम किया हो।मेरे अधीन विभाग परफ़ोरमेंस में नं-1 है।

हाँ, दो साल पहले एक ग़लती की। हमने बिहार चुनाव में BJP को रगड़-रगड़ कर तबियत से जो धोया उसी पीड़ा का मोदी जी हमसे बदला ले रहे है।"

Sunday, 9 July 2017

मैं अन्य पिछड़े वर्ग से हूँ मैं यह ऐलान करता हूँ कि...

मैं अन्य पिछड़े वर्ग से हूँ मैं ये ऐलान करता हूँ कि आगामी चुनावों में मेरा वोट उस दल के लिए होगा जो:--

1. OBC वर्ग को सभी क्षेत्रों में भागीदारी सुनिश्चत करने के लिए जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने का संकल्प रखेगा और फौरी तौर पर 52% आरक्षण देने का प्रावधान करायेगा।

2. मंडल आयोग की सिफारिशों को 100% लागू करने का संकल्प करेगा। जिसके अंतर्गत OBC वर्ग के छात्रों के लिए आवासीय तकनीकि कॉलेज, पिछड़ा वर्ग मंत्रालय, वित्त निगम, गरीब मजदूरों के लिए कृषि भूमि उपलब्ध कराने जैसी अनुसंशायें हैं।

           जय ओबीसी जय संविधान।

सहमत हैं तो आगामी चुनाव तक फारवर्ड करते रहिये, नतीजा अवश्य मिलेगा।

ओबीसी हैं,और सहमत न हों; तो बात करें 9301527229

लोकेश साहू, जिला संयोजक
ओबीसी महासभा जिला-सिवनी (म.प्र)