Saturday, 26 August 2017

हिंसा के लिए कोर्ट को जिम्मेदार बताने वाले नेता नगरी अदालत की अवमानना के असली गुनहगार है- सूरज कुमार बौद्ध


सीबीआई की पंचकूला अदालत ने जैसे ही ढोंगी बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह को बलात्कार का अपराधी ठहराया वैसे ही पंजाब और हरियाणा में बलात्कारी बाबा के भक्तों ने कानून अदालत तथा संविधान को ठेंगा दिखाते हुए आतंक का माहौल बना दिया।

 सैकड़ों बसों को जलाकर राख कर दिया गया, आम जनमानस से लेकर पत्रकार बंधुओ तक पर  जानलेवा हमला किया गया, सैकड़ों करोड़ों संपत्ति को तहस-नहस कर आग के हवाले कर दिया गया, 30 से अधिक मासूमों की जाने चली गई है लेकिन इन सब के बावजूद धर्म के आधार पर अपना दुकान चला रहे नेताओं की बेतुकी बयानबाजी इंसानियत के चेहरे पर गहरा तमाचा मारती है।

क्या हिंसा के लिए अदालत भी जिम्मेदार?
तत्कालीन हिंसा प्रकरण में शामिल भक्तों को आधार बनाकर कई नेताओं ने अदालत को खुली चुनौती देते हुए हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया तथा उनकी बयानबाजी एक तरह से अदालत के फैसले को सांप्रदायिक रंग देते हुए नजर आई। भाजपा नेता तथा सांसद साक्षी महाराज भारतीय राजनीति के एक ऐसे ही नेता हैं जो चर्चा में आने के लिए कुछ भी अनाप शनाप बकते रहते हैं। मीडिया भी साक्षी महाराज के बयान को केंद्र बिंदु बनाती है। दरअसल आम आवाम के दुख दर्द से बेखबर इस तरह के नेता लोगों का बयान आता ही इसीलिए है ताकि असली चर्चा के विषय को नजरअंदाज किया जा सके। साक्षी महाराज ने अदालत को गलत ठहराते हुए हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया। बात को आगे बढ़ाते हुए साक्षी महाराज यहां तक नहीं रुके बल्कि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अदालत को भारतीय संस्कृति पर षड्यंत्र रचने का आरोप भी लगाया। आइए जरा साक्षी महाराज के बयान पर एक नजर डालते हैं:
1- एक शिकायतकर्ता सही है या बाबा के करोड़ो भक्त गलत?
2- इस पूरे हिंसा तथा नुकसान के लिए कोर्ट भी जिम्मेदार है।
3- राम रहीम तो सीधे साधे हैं इसलिए कोर्ट ने उनको तो बुला लिया
4- कर्नल पुरोहित के साथ क्या हुआ? प्रज्ञा भारती ठाकुर के साथ क्या हुआ? ये योजना बद्ध तरीके से ये साधु-सन्यासी नहीं, (अदालत का) भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का षडयंत्र है.”
5- एक आदमी यौन शोषण का आरोप लगा रहा है। पूर्वाग्रह भी हो सकता है। कुछ लोभ लालच भी हो सकता है।

क्या अदालती इंसाफ का यह जातिवादी चेहरा है?
अब एक प्रमुख सवाल यह उठता है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय को जस्टिस कर्णन द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे गए 20 जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी एक पत्र से इतनी बोखलाहट हो गई थी कि सर्वोच्च न्यायालय के उन्ही सात जजों की पीठ ने जस्टिस कर्णन के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही करते हुए जस्टिस कर्णन के आरोप को अदालत की अवमानना माना था। लिहाजा जस्टिस करनन को 6 महीने के लिए जेल की सजा हुई। वर्तमान में जस्टिस कर्णन को गिरफ्तार कर जेल के हवाले कर दिया गया है। सांसद ने अदालत को भी हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया लेकिन वही सर्वोच्च न्यायालय, वही उच्च न्यायालय, वही अदालत आज क्यों मौन है? आखिर क्यों? जस्टिस कर्णन प्रकरण पर स्वतः संज्ञान लेने वाली अदालत क्या आज असहाय है एक सांसद पर अदालत की अवमानना नोटिस जारी करने के लिए? आखिर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 तथा अनुच्छेद 215 का सही अनुपालन कब होगा जो कि अदालत की अवमानना करने वालों को दंडित करने की बात करती है। माननीय अदालत को समय रहते इस मसले पर संज्ञान लेना चाहिए वरना इंसाफ का जातिवादी चेहरा मुझे स्पष्ट दिखाई दे रहा है। और आपको…..?

– सूरज कुमार बौद्ध,
(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)

Friday, 25 August 2017

क्या आरक्षण से जातीय संघर्ष उत्पन्न होता है?

आरक्षण से जातीय संघर्ष की बात करने वाले ही अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़ों के सबसे कट्टर एवं खतरनाक दुश्मन है।

क्योंकि वे इन शोषित वर्गों को किसी भी क्षेत्र में स्वयं से ज्यादा बढ़कर नही देखना चाहते है।ऐसे लोगो की छाती पर साँप लोटने लग जाते है,जब किसी शोषित वर्ग को वे उच्च पद पर बैठा देखते है और इन्हें जब उसके सामने उपस्थित होना पड़ता है, क्योंकि ऐसे अवसर पर उनके दिमाग मे वही सड़ा-गला विचार उत्पन्न हो जाता है कि जो व्यक्ति कल तक हमारे पांव की जूती था,आज वह हमारे सामने उच्च पद पर कैसे विराजमान है?
कल तक जो हमारी ठोकरों में लुढकता था,वही आज हमें आदेश कैसे दे रहा है? बस मूल कारण यही है जातीय संघर्ष उत्पन्न होने का।

अन्य कोई कारण नही है, अन्य तमाम बातें तो इनकी कोरी बकवास मात्र है।
आरक्षण का विरोध करने वालो को इस विषय मे एक बात पर स्वयं अच्छी तरह से ठंडे दिलो दिमागों से विचार करने की जरूरत है।
वह यह है कि जब उनकी दृष्टि में आरक्षण का होना अच्छी बात नही है। इसे समाप्त कर देना चाहिए,तो फिर वे स्वयं अपने लिए आरक्षण की मांग क्यों कर रहे है?

दरअसल ऐसे लोग शासन - प्रशासन के उच्च पदों पर अपना ही एकाधिकार करना चाहते है।ऐसे लोगो का एकमात्र दर्द यही है कि शासन - प्रशासन के उच्च पद पर हमारे ही अधिकार में रहे,अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़ों के नही इन पर हुकूमत करने का अधिकार हमारा है, इनका हम पर कतई नही।
हम ही इन पर रुआब झाड़ सकते है। इनका हमारी हाँ में हाँ मिलने के अलावा कोई दूसरा कार्य नही होना चाहिए। इस विकृत मानसिकता वाले लोगो को दोगले भी कहा जाए,तो कोई बुरी बात नही होगी,क्योंकि एक तरफ जिस मुंह से ये आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की बात करते है, उसी मुंह से ये उसे अपने लिए लागू करने की भी बात करते है।


द्वारा-दुर्गेश यादव"गुलशन"
(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष है)।

राम रहीम मामला से जुड़ी हकीकत: आंबेडकरवादियों ने ज़मीन ख़ाली कर दी, बाबाओं ने पकड़ ली


राम रहिम प्रकरण इस समय देश में सबसे चर्चित मामला बनकर उभरा है सोशल मीडिया गरम है पत्रकार एंव समाजिक चिंतक दिलीप मंडल ने फेसबुक पर लिखा है कि "यह डेरों की सफलता नहीं, आंबेडकरवादी-समाजवादी- समतावादी राजनीति की असफलता है।

हरियाणा, पंजाब और साथ लगे राजस्थान का हिस्सा सामाजिक आंदोलनों की दृष्टि से बंजर साबित हुआ है, यह देश में अनुसूचित जाति की सबसे सघन आबादी वाला इलाक़ा है। हर तीसरा आदमी SC है।
यहाँ समाजवादी आंदोलन कभी नहीं पनप सका। मंडलवादी-समतावादी राजनीति से भी यह इलाक़ा अछूता रहा। बीएसपी का यहाँ का उभार भी क्षणिक साबित हुआ। बाक़ी का आंबेडकरवादी आंदोलन भी सीमित ही रहा।

ऐसे में जनता के पास कोई सपना नहीं बचा। कोई भी नहीं था जो बेहतर समाज का सपना दिखाए।
इसी शून्य में नीचे की जातियाँ डेरों की शरण में चली गई। यहाँ का भाग्यवाद उन्हें सुकून देता है। साथ बैठकर प्रवचन सुनना ही इनका एंपावरमेंट है।

कोई ब्राह्मण तो डेरों में जाता नहीं है। उनका तो अपना मंदिर है। डेरा नीची की जातियों के लोगों के लिए हैं। हालाँकि कोई भी बाबा नीचे की जातियों का नहीं है। ये बाबा चुनाव के समय जनता को इस या उस पार्टी को बेच देते हैं।
जनता के पास विकल्प क्या था? जिसने विकल्प दिया, लोग उसके पास चले गए।
आंबेडकरवादियों ने ज़मीन ख़ाली कर दी, बाबाओं ने पकड़ ली। जनता के पास आंबेडकरवादी विकल्प था कहाँ?
इसलिए डेरा भक्तों को दोष मत दीजिए।
यह समाजवादी-आंबेडकरवादी राजनीति की असफलता का साइड इफ़ेक्ट है।

समाजवादी-आंबेडकरवादी सपनों के बिना समाज का डेरा बन जाता है।

वहाँ ऐसे लोग राज करते हैं।"

Sunday, 20 August 2017

मुझे मार सकते हो, मेरी विचारधारा को नहीं - श्रेयत बौद्ध


हम बुद्ध, फुले, पेरियार, बिरसा और अम्बेडकर की जय बोलते हैं तो इन्हें बुरा लगता हैं।

क्योंकि हम उन महापुरुषों का सम्मान करते हैं जिन्होंने मनुवाद को जड़ से हिला दिया था, इनके षड्यंत्र की पोल खोल दी थी।

हम इनके झूठे आदर्शो को चुनौती दे रहे हैं हम विद्या की देवी उसे मान रहे हैं जिस फुले दम्पत्ति ने देश का हर वर्ग के लिए पहला विद्यालय खुलवाया था और माँ सावित्रीफुले ने घोर अपमान के बावजूद विधवा स्त्रियों , अछूत कहे जाने वाले बालक बालिकाओ के लिए शिक्षा की क्रांति की उसे सम्मान देते हैं।

तो इन्हें सच से डर लग रहा है क्योंकि झूठ का पर्दाफाश हो रहा है, तभी तो IIT madras में अम्बेडकर - पेरियार स्ट्डी सर्कल पर केंद्रीय मंत्री के हस्तक्षेप पर बेन लगा दिया जाता है और रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या कर दी जाती हैं।

अब नया और रौंगटे खड़ा कर देने वाला समाचार आया है हमारे अम्बेडकरवादी युवा पर जानलेवा हमला हुआ है वह खून से लतपथ है किंतु उनके जज्बे को सलाम उन्होंने अपने फसेबूक पर लिखा है कि..

 " मुझे मार सकते हो, मेरी विचारधारा को नहीं।
मौत भी आ जाये पर बाबासाहेब की विचारधारा की लड़ाई लड़ना नहीं छोडूंगा।

फुले-अंबेडकरी विचारधारा की बात करने पर मनुवादियों द्वारा मेरे ऊपर जानलेवा हमला कराया गया है।

जय भीम..!!

हूल जोहार..!!"


 Shreyat Bouddh

Thursday, 17 August 2017

बुद्ध की मूर्ति पर गोबर फेकने के विरोध में कटँगी बंद..


कटँगी | बालाघाट मुख्यालय से 2 कि मी दूर स्थिति नागार्जुन परिसर जहाँ प्रतिवर्ष विशाल बौद्ध महा सम्मेलन धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाता है।


प्रतिवर्ष लाखों की तादाद में अनुयायी शरीक होते है!विशाल परिसर होने पर लंका से तथागत बुद्ध के अस्थि कलश बौद्ध भिझु लेकर आये थे उक्त स्थल बौद्ध अनुयायीओ के श्रद्धा का स्थल है जहाँ तथागत बुद्ध की मूर्ति स्थापित है, असामाजिक तत्वों के द्रारा तथागत बुद्ध की मूर्ति पर गोबर फेककर अपमानित करने का कृत्य किया गया जिससे बुद्ध - अम्बेडकर अनुयायियों में काफी रोष व्याप्त है।


अधिवक्ता संजय खोब्रागडे के द्रारा लिखित शिकायत किये जाने पर थाना प्रभारी कटंगी के द्रारा अज्ञात लोगों के विरुद्ध धारा 153A 295A IPC के तहत दिनांक 10-8-2017 को अपराध दर्ज किया गया।

किन्तु पुलिस विभाग के द्रारा आरोपियों को पकड़ने में हाला हिवाला किये जाने पर बौद्ध अनुयायीओ में रोष व्याप्त है, बुध्द - अम्बेडकर अनुयायियों ने आहूत बैठक में बुद्ध अम्बेडकर संघर्ष समिति कटंगी का गठन किया गया, जिसमें अधिवक्ता संजय खोब्रागडे, ओमदास मेश्राम, प्रशांत मेश्राम, सुरेंद्र गजभिये, प्रशांत हुमनेकर(पार्षद), कपिल नागदेवे और भीम प्रकाश मेश्राम इत्यादि के नेतृत्व में 20 अगस्त को कटंगी बन्द का आव्हान किया गया हैं।

अधिवक्ता संजय खोबरागड़े ने आह्वान किया है कि सभी बुद्ध - अम्बेडकरवादी अधिक से अधिक तादाद में उपस्थित होकर बन्द धरना प्रर्दशन को सफल बनायें।

उक्त आंदोलन बुद्ध अम्बेडकर संघर्ष समिति कटंगी बालाघाट (म. प्र) एंव वी लव बाबासाहेब सोशल सोसायटी के सयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न होगा जिसमें जिले भर के सभी अम्बेडकरवादी संगठनों की उपस्थिति होगी सभी संगठन एक मंच पर आकर अपनी एकता का परिचय भी देंगे।

Wednesday, 16 August 2017

सोनू सॉंग से मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह पर हमला

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लांच किया इंदौर कांग्रेस आईटी सेल का वीडियो गीत.....

इंदौर कांग्रेस आईटी सेल द्वारा बनाये गए वीडियो गीत "एमपी तूने शिवराज पर भरोसा क्यों किया"  को इंदौर रेसीडेंसी कोठी में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लांच किया। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कांग्रेस उपाध्यक्ष  तुलसी सिलावट, डॉ. धर्मेंद्र बाजपेयी भी उपस्थित थे।


वीडियो गीत इंदौर कांग्रेस आईटी सेल के शहर अध्यक्ष विपिन गंगवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने तैयार किया। वीडियो में जयदेव मालवीय, किशोर धुलधोए, सुमित सेठी, सुयश बाकलीवाल, भास्कर जोशी, सुनील प्रजापत, राहुल त्रिपाठी, राहुल राजपुरोहित, राहुल राजोरे, मोहित अग्रवाल, संजू राठौर, आशय गंगवाल ने अपनी भूमिका अदा की।

इस अवसर पर इंदौर आईटी सेल के राकेश परिहार, महेंद्र पांडेय, बलराम चंद्रवंशी, नितीश मिश्रा, पवन तंवर, चिराग गोधा, अमित चौहान, रवि सहगल भी उपस्थित थे।