Saturday, 20 August 2016

सच्चा इतिहास जानने के लिए पढ़िये बाबासाहेब अम्बेडकर लिखित साहित्य अब ऑनलाइन उपलब्ध





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नरसिंह यादव को द्रोणाचार्य के अनुयायियों ने एकलव्य बनाया

मुझसे मेरा सपना बेरहमी से छीन लिया: नरसिंह यादव

भारतीय पहलवान नरसिंह ने कहा है कि उनका सपना ओलंपिक पदक हासिल कर देश का सम्मान बढ़ाने का था, जिसे छीन लिया गया है.

आखिर क्या है घटनाक्रम:
नरसिंह यादव को डोपिंग मामले में भारत की डोपिंगरोधी एजेंसी नाडा ने क्लीन चिट दी थी, लेकिन विश्व डोपिंगरोधी एजेंसी वाडा ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ कोर्ट ऑफ़ ऑर्बिट्रेशन (सीएएस) में अपील की थी.
गुरुवार को सीएएस ने लगभग चार घंटे चली सुनवाई के बाद वाडा की अपील स्वीकार कर ली और नरसिंह पर चार साल का प्रतिबंध भी लगा दिया था.

नरसिंह यादव पर लगाया चार साल का बैन
सीएएस के फ़ैसले के बाद नरसिंह ने कहा, ''मेरा सपना था कि मैं ओलंपिक पदक हासिल कर देश का मान बढ़ा सकूं, लेकिन मुझसे इस सपने को बड़ी बेरहमी से छीन लिया गया.''
नरसिंह का कहा है कि उन्हें साज़िशन फंसाया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विरोधियों ने उनके खाने-पीने में कुछ 'मिलाया' था.
नरसिंह ने कहा कि वो इस फैसले से हार नहीं मानेंगे और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे. उन्होंने कहा कि मेरा और मेरे विरोधियो का नार्को टेस्ट किया जाये.

नरसिंह यादव ने देश का गौरव बढ़ाया है
नरसिंह यादव पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक के अलावा 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. इसके अलावा वह साल 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में 74 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीत चुके हैं.
यह द्रोणाचार्य की परम्परा है
वर्षो से इस देश में षड्यंत्र,धोखा ही होता रहा है यदि हम महाभारत के पात्र एकलव्य की चर्चा करे तो स्पष्ट हो जाता है कि अयोग्य को कैसे योग्य घोषित किया जाता है यही कहानी हमेशा दोहराई जाती रही है क्योकि इस देश में कपटी, द्रोणाचार्य को सम्मान से देखा जाता है और अयोग्य अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी के रूप में देखा जाता है तभी तों इनके नामो से सर्वश्रेष्ठ खेल पुरस्कार दिया जाता है।
सरकार-मीडिया, द्रोणाचार्य-अर्जुन को महिमामण्डित करती है और इस देश में फरेब, छल की जय-जय कारती है, झूठ का प्रोपोगेंडा चलता है। इसलिए सच, योग्य कुचला जाता है उसे हमेशा-हमेशा के लिए दफन कर दिया जाता है। जब देश की जांच एजेंसी ने नरसिंह को बेगुनाह माना और यह भी माना की नरसिंह के साथ षड्यंत्र हुआ है, फिर भी षड्यंत्रकारी कैसे अपने मंसूबो में सफल हुए? यह नरसिंह यादव का अपमान नही है बल्कि सम्पूर्ण भारत के योग्य खिलाड़ियों का अपमान है देश का अपमान है करोड़ो खेल प्रेमियो की भावनाएँ आहत हुई है। 
यह व्यवस्था और कितने एकलव्य बनाएगी?
विवेक भारती, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ,सोशल मिडिया संगठन
फेसबुक पर इस अन्याय, षड्यंत्र की घोर निंदा हो रही है। विवेक भारती, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीं लव बाबासाहेब आईटी एंव सोशल मिडिया संगठन ने लिखा है कि "द्रोणाचार्य अर्जुन को किसी ने नहीं देखा फिर भी उनके नाम पर अवार्ड क्या कोई बताएगा ओलंपिक में एशियन गेम में अर्जुन ने द्रोणाचार्य ने कितने गोल्ड मैडल लिए थे ?
पीटी उषा के नाम पर क्यों अवार्ड नही बुधिया के नाम से क्यों अवार्ड नही .....बाकि नाम आप जोड़े"
नरसिंह यादव को एकलव्य बनाया गया है।
कपटी एंव अयोग्य की महिमा बन्द हो अब और एकलव्य नही चाहिए।
खिलाड़ियों को सरकार पर्याप्त मदत नही करती है खेल बजट कम करके आर्थिक तंगी की नौटँकी करती है किन्तु जब यही खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का जौहर दुनीयाँ को दिखाते है तब करोड़ो रूपये बरसाएँ जाते है मिडिया सुबह शाम उनका भजन करता है और देश भर में धार्मिक कर्मकाण्ड का धारावाहिक दिखाया जाता है ऐसा लगता है खिलाड़ी अपनी मेहनत से नही पूजा-पाठ से मेडल ले आये है।
पी.टी उषा, ध्यानचंद, मिल्खा सिंह अन्य कई महान खिलाड़ियों के योगदान की चर्चा हो खेलो में
खेल को धर्म से न जोड़ा जाए सभी अपनी धर्मिक मान्यताएँ अपने पास रखे सिर्फ खेल भावना की चर्चा हो ताकि अंधविश्वास को बढ़ावा न मिले।
अब अंत में दो प्रश्न
क्या नरसिंह यादव को न्याय मिलेगा?
षड्यंत्रकारियो का चेहरा कब बेनकाब होगा?

आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर, पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.
लेखक: सुरेश पासवान, राष्ट्रीय महासचिव वीं लव बाबासाहेब आईटी एंव सोशल मिडिया संगठन




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Thursday, 18 August 2016

उत्तरप्रदेश के जुझारू अम्बेडकरवादी युवाओ की टीम का विस्तार हुआ

कल्पना बौद्ध, झाँसी-मंडल अध्यक्ष
आज पुरे भारत में मनुवादी आतंकवादी खुलेआम सरकार के संरक्षण में दिन दहाड़े मनुस्मृति के विधाननुसार जातिवादी आतंक फैला रहे है।

सरकार भी असहाय नजर आ रही है जब यह सरकार देश के आंतरिक जातिवादी आंतकवादियो से भयभीत है तब वह पाकिस्तानी प्रायोजित आतंकवाद से कैसे मुकाबला करेगी?
विगत दिनों देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी इन आतंकवादियो के सामने गिड़गिड़ाते नजर आये हो सकता है यह एक स्क्रिप्ट थी जिसे हम नाटक भी कह सकते है किन्तु यदि यह सत्य है तो सोचिये देश किस दिशा में जा रहा है?

गौ रक्षा के नाम पर अमानवीय हिंसा किसी भी सभ्य समाज में बर्दास्त नही किया जा सकता। प्रधानमन्त्री के बयान के बाद कथित धार्मिक ठेकेदार नंगी तलवारे लहरा रहे है पिस्तौल ले कर आतंक फैला रहे है यह नजारा गुजरात में 15 अगस्त को सड़को पर देखने को मिला जब देश 70वीं आजादी का जश्न मना रहा था पुलिस की मौजूदगी में गुंडागर्दी हुई।

पुरे देश में धार्मिक भावना को ढाल बना कर जातिवादी आतंकवाद की घटनाओ की खबर देखने-सुनने को मिल रही है।

यही कारण है कि जागरूक, शिक्षित युवा बुद्ध, फुले, साहूजी, नारायनागुरु, बिरसा, पेरियार, अम्बेडकर के विचारो को अपना कर छाती चौड़ी करके इनके खिलाफ आक्रोशित है और इनकी अमानवीय हरकतों का पर्दाफास भी कर रहे है। विगत दिनो गुजरात से शुरू हुई समाजिक क्रान्ति की तेज आंधी अब सुनामी का रूप ले चुकी है।

इसके पीछे सोशल मिडिया में सक्रिय लाखो अम्बेडकरवादी युवाओ का महत्वपूर्ण योगदान है जिस सच्ची घटना को राष्ट्रीय संचार माध्यम छुपाता है उसे सोशल मिडिया विश्व के सामने ले आ रहा है यही कारण है की गुजरात की घटना का विरोध पुरे देश के अतिरिक्त विश्व के कई देशो में हो रहा है।

भारतीय संविधान या भारत रत्न पर विगत दिनों मध्यप्रदेश के एक मनुवादी सरफिरे ने भद्दी-भद्दी गालियां दी और कई अशोभनीय टिप्पणी की थी जिसके विरोध में सोशल मिडिया के युवाओ ने जबरजस्त माहौल निर्मित किया जिससे कई समाजिक एंव राजनैतिक संगठन सक्रिय हो कर देश भर में पुलिस और सरकार को ज्ञापन भी दिया इसी कारण वह 16 अगस्त को गिरफ्तार भी कर लिया गया।

उमेश गौतम-प्रदेश महासचिव
वी लव बाबासाहेब आईटी एंव सोशल मीडिया संगठन देश का पहला अम्बेडकरवादी संगठन है जो सोशल मिडिया के माध्यम से देश भर के अम्बेडकरवादी युवाओ को साथ पूर्णतः समाजिक मिशन के लिए सक्रिय है। देश के प्रत्येक प्रदेशो में संगठन विस्तार की प्रक्रिया जारी है। इसी श्रंखला में उत्तरप्रदेश में भी विभिन्न नियुक्तियाँ हुई।

पुष्प कुमार बौद्ध,मंडल अध्यक्ष-अलीगढ़

धर्मेन्द्र गौतम,मंडल अध्यक्ष - सहारनपुर




भीम प्रकाश गौतम, प्रदेश अध्यक्ष,उ.प्र, वी लव बाबासाहेब आईटी एंव सोशल मिडिया संगठन ने जुझारू अम्बेडकरवादी युवाओ की टीम का फिर से विस्तार किया है।

पदाधिकारियो के नाम:

1. उमेश गौतम-प्रदेश महासचिव

मण्डल अध्यक्ष

1. धर्मेन्द्र गौतम, सहारनपुर
2. पुष्प कुमार बौद्ध, अलीगढ़
3. कल्पना बौद्ध, झाँसी

1. सुरेन्द्र सिंह गौतम, मण्डल उपाध्यक्ष- झाँसी

जिला अध्यक्ष
1. भानु सिंह गौतम, झाँसी
2. हरगोविंद राजन, ललितपुर
भानु सिंह गौतम,जिला अध्यक्ष झाँसी
रवि दोहरे,जिला अध्यक्ष जालौन
सुरेन्द्र सिंह गौतम, मण्डल उपाध्यक्ष- झाँसी
3. रवि दोहरे, जालौन
हरगोविंद राजन,जिला अध्यक्ष ललितपुर
In Association with Amazon.in राष्ट्रीय अध्यक्ष माला दास, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- अविनाश गाडवे, विवेक भारती, सुरेश पासवान- राष्ट्रीय महासचिव, पंकज छायवान- राष्ट्रीय सचिव, शौर्य गौतम- राष्ट्रीय प्रवक्ता, गजेन्द्र जाटव- संस्थापक सदस्य ने इस नियुक्ति पर बधाई प्रेषित की है वही उत्तरप्रदेश अम्बेडकरवादियो की टीम ने भी क्रांतिकारी जय भीम के साथ अभिवाद किया है।

घोड़े गधे की कहानी बना कर घृणा उतपन्न करने वालो बधाई दो भारत की इन बेटियो को।

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तुलसीदास, मनु देख रहे हो न?
¶ गर्भ में ही बच्ची को मारने वालो हत्यारो देखो इनकी योग्यता!
¶ सती प्रथा के नाम पर हैवानियत करने वालो देखो नारी शक्ति को!
¶ ढोर, गवार, शुद्र, पशु, नारी सकल ताड़न के अधिकारी बोलने वालो बधाई दो इन्हें!

बुद्ध, फुले दम्पत्ति एंव बाबासाहेब अम्बेडकर की क्रान्ति!
साक्षी मलिक ने कांस्‍य जीतकर रचा इतिहास, ओलिंपिक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं.
क्या ओलम्पिक में भी आरक्षण है?
धन्यवाद दो बुद्ध, फुले, साहूजी, पेरियार, बिरसा, अम्बेडकर और भारतीय संविधान को जो हर भारतीय को समानता का हक देता है।
बधाई-बधाई-बधाई

सुरेश पासवान द्वारा फेसबुक पर की गई लोकप्रिय टिप्पणी

Sunday, 14 August 2016

उठो! तुम सोए हुए शेर हो उठो और विद्रोह करो - भगत सिंह

आप सभी को स्वतन्त्रता दिवस की बहुत-बहुत मंगलकामनाए-बधाई



हमे ख़ुशी है की आज ही के दिन भारत सवतंत्र हुआ इस महान दिवस को प्रत्येक भारतीय को भूलना नही चाहिए दिवाली,होली,ईद,क्रिसमसडे आदि अन्य सभी धार्मिक पर्वो से बड़ा यह हम सबका प्रत्येक भारतीय का महापर्व है इसलिए 15 अगस्त और गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय पर्व कहा जाता है।

कई लाखो शहीदों के कारण देश विदेशी शासको से आजाद हुआ हमे उन अनगिनत महान विभूतियो को हमेशा नमन करना चाहिए जिनकी बदौलत हम आजाद भारत में जी रहे है।

आजादी के 70 वर्षो में हमने बहुत कुछ पाया है देश विकसित तो नही हुआ किन्तु भारत विश्व की आर्थिक शक्तियो में से एक है यह नकारा नही जा सकता है। सुरक्षा की दृष्टि में भी भारत शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने है. विज्ञान, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य में भी हमारे कदम बढ़ रहे है, हमे निराश नही होना चाहिए. यदि हम आलोचक की दृष्टि से देश की स्थिति पर नजर दौड़ाए तो निश्चित रूप से हम देखेंगे की देश को जितना सक्षम होना चाहिए था उतना हम आज सफल या सक्षम नही हो पाये है यह तो कटु सत्य है फिर भी हम आगे बढ़ रहे है यह आशाजनक भी है।

देश की आजादी के कई मायने है

हमे इस ख़ुशी के मौके पर चिंतन करना आवश्यक है। क्योकि हम पिछले 70 वर्षो से यह राष्ट्रीय पर्व तो मना रहे है किन्तु हकीकत से मुँह भी छुपा लेते है देश में कुपोषण के कारण हर वर्ष लाखो बच्चे, नवजवान, बुजुर्ग असमायिक मृत हो जाते है। बाल श्रम रोकने के लिए संविधान में कठोर प्रावधान होने के वावजूद धड़ल्ले से मासूम कठोर परिश्रम करते है बच्चपन खेल, शिक्षा से महरूम हो रहा है। उसी तरह महिलाओ को संविधान द्वारा सशक्त नागरिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किये है जो गणतंत्रत लागू होने से पूर्व नही थे। फिर भी हर वर्ष करोड़ो महिलाये उत्पीड़न, अत्याचार की शिकार हो रही है लिंग अनुपात में बहुत अंतर बढ़ रहा है नवजात शिशुओ की भ्रूण हत्यायें होती है। यह एक ज्वलन्त और चिंतनीय विषय है। भारतीय संविधान ने देश को धर्म निरपेक्ष घोषित किया है किन्तु आज भारत में धर्म के नाम पर हर वर्ष कई घोर निंदनीय, दुखित कर देने वाले दंगे-फसाद हो जाते है। भारतीय संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक एंव स्वतन्त्र जीवन जीने का प्रावधान करता है किन्तु आज के आधुनिक युग में भी इस देश में रोज जातीय हिंसा होती रहती है जिसे जान कर कलेजा काँप जाता है नफरत की इस जड़ को नष्ट करने के लिए संविधान ने विशेष कई प्रावधान किये है उसी का परिणाम है कि देश में कठोर कानून बने ताकि शोषित वर्गो (अनुसूचिति जाति -जनजाति, पिछड़ावर्ग) के साथ अमानवीय व्यवहार बन्द हो किन्तु संविधान और कानून को रोज कई जातिवादी आतंकवादी अँगूठा दिखाते है और बेख़ौफ़ जातिवादी मानसिकता का परिचय देते हुए जातिवादी आतंकवाद फैलाते है। दयनीय स्थिति कृषको की भी है जबकि भारत कृषि प्रधान देश कहलाता है हर वर्ष लाखो किसान आत्म हत्या करने के लिए मजबूर हो रहे है उन्हें आर्थिक मदत देने के लिए सरकारो के पास धन का अभाव रहता है जबकि देश के मुठ्ठी भर पूंजीपतियो को अरबो रूपये की सहायता की जाती है। भारतीय संविधान मिश्रित अर्थव्यवस्था का प्रावधान करता है किन्तु पूंजीवाद को सरकार स्वंय सरंक्षण देती है किसी भी देश की तरक्की के लिए उद्योगों का होना जरूरी है किन्तु कृषि प्रधान कहे जाने वाले देश में किसानो के प्रति सरकार का रवैया निराशाजनक है। सरकारी कर्मचारियों की औसत मासिक आय 50000 रु है तो निजी संस्थानो में कार्य करने वाले श्रमिको की औसत मासिक आय लगभग 10000 रु से भी कम है जबकि शासकीय नौकरियां प्रतिदिन घट रही है और पूंजीपति उत्साहित हो कर निजी उद्योग लगा रहे है और श्रमिको-कर्मचारियों को मनमाने ढंग से वेतनमान देते है। गौरतलब हो की इन संस्थानो में कार्य करने वालो के हित में आवाज कोई राजनैतिक दल या नेता नही उठाते निजीकरण का यही आलम रहा तो देश में शासकीय नौकरी लगभग खत्म हो जायेगी संविधान समाजिक रूप से शोषित वर्गो को नौकरियों में विशेष अवसर की सुविधाएं देती है किन्तु निजी संस्थानो में संविधान के यह प्रावधान लागू नही है सायद यह आरक्षण समाप्त करने का एक बेमिशाल षड्यंत्र है। उसी तरह शिक्षा में भी निजीकरण हो चूका है देश में एक शिक्षा बोर्ड नही है जबकि संविधान सभी वर्गो के बच्चों को मुफ़्त एंव समान शिक्षा देने हेतु प्रावधान करता है। आज गरीब या शोषित वर्गो के बच्चे स्कुल में पढ़ने नही थाली लेकर भोजन करने जाते है। और भी कई गम्भीर समस्याएँ जिनकी चर्चा हम अभी नही कर रहे है जैसे भ्रष्ट्राचार, महंगाई, सीमा पार आतंकवाद आदि।

इन सभी समस्याओ का मुख्य कारण धार्मिक, समाजिक एंव प्राचीन राजनैतिक मानसिकता है।

बहुत से लोग संविधान-कानून की आलोचना करके सच्चाई से दूर-दूर तक रूबरू नही हो पाते है जबकि संविधान देश के प्रत्येक नागरिको की सुरक्षा-स्वतन्त्रता के लिए प्रावधान करता है कानून भी शख्त है फिर भी देश आंतरिक रूप से अशांत एंव असुरक्षित है। भारत में संविधान 26 जनवरी 1950 में लागू तो हो गया था किन्तु देश में धार्मिक वर्ग संविधान को नही धार्मिक व्यवस्था, ग्रंथो को महत्वपूर्ण मानते है। यही कारण है की स्त्रियों को आज भी मन्दिर प्रवेश पर प्रतिबन्ध है उन्हें ताड़न की अधिकारी समझा जाता है तभी तो नवजात शिशुओ का गर्भपात किया जाता है सिर्फ लिंग के आधार पर यही गर्भपात करने वाले नव दिन भूखे-प्यासे रह कर अपने आपको धार्मिक स्वंय घोषित करते है। स्त्रियों के बाद बारी आती है शोषित वर्गो की उन्हें आज भी हेय द्रष्ट्रि से देखा जाता है आपने गुजरात का ऊना काण्ड सुना ही होगा। और उसके बाद भारत के स्वंय घोषित मजबूत प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी का शर्मसार कर देने वाला बयान भी सुना होगा उन्होंने कहा था कि "दलितों(SC,ST,OBC) को मत मारो मारना ही है तो मुझे गोली मार दो।" धर्म के ठेकेदारो के सामने देश का प्रधानमंत्री हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ा रहा है इससे ज्यादा शर्म की और क्या बात हो सकती है कारण धर्म के प्रति मानसिक गुलामी है। क्या इन जातिवादी आतंकवादियो को सख्त-सख्त कानून सजा प्रधानमंत्री के आदेश से नही दी जा सकती? मिडिया भी जातीय हिंसा करने वालो को दबंग कहता है। रोहित वेमुला की असामयिक मृत्यु के जिम्मेदार लोग आज सर उठा कर घूम रहे है सरकार मौन है, पुरे देश में जातीय हिंसा चरम पर है क्या सरकार और पुलिस से मजबूत है यह कथित धार्मिक लोग? धार्मिक उन्माद को धार्मिक एंव राजनैतिक लोग भड़का कर वोट की राजनीति करते है इसी कारण पुलिस मूक दर्शक बनी रहती है। गरीब कृषक की जान की कोई कीमत नही है किन्तु पूंजीपति को कोई हानि न हो इसका ख्याल सरकारें बराबर रखती है क्योकि वे सामन्तवादी,पूंजीवादी पुरानी मानसिकता से मुक्त नही है। अन्धविश्वास को सरकारी मान्यता है देश के राष्ट्रपति से लेकर चपरासी तक ढोंगी, बलत्कारी, संविधान विरोधी धर्म गुरुओ के चरणों में शीश नवाते है आशीर्वाद लेते है। वे खुलेआम संविधान विरोधी, गैरकानूनी, अमानवीय फतवे, निर्देश जारी करते है मुठ्ठी भर आम लोग विरोध करते है और सत्ताधारी मौन रहते है आखिर वे मानसिक गुलाम जो ठहरे। टीवी पर सुबह शाम भविष्यणी, प्रवचन करने वाले बाबाओ की दूकान चलती है देश की जनता में वैज्ञानिक सोच कैसे विकसित होगी।
किन्तु सरकार इन ज्योतिषियों से कभी यह प्रश्न नही करती की प्राकृतिक आपदा या आतंकवादी घुसपैठ की भविष्यवाणी क्यों नही की?
सुरक्षा यन्त्र बेचे जाते है, मनोकामना पूरी करने के लिए मन्त्रोच्चार वाले यन्त्र बिकते है कभी किसी राजनैतिक नेता ने इसका विरोध नही किया गरीब,अनपढ़ बेचारे खुले आम लूटते है इनसे किन्तु सरकार ने यह कथित सुरक्षा यन्त्र सीमा पर तैनात सुरक्षा बलो के लिए नही खरीदी? नेता अपनी सुरक्षा में कौनसा कवच रखते है?
महंगाई, भ्रष्ट्राचार, काला धन का मुद्दा उठाने वाले आज कल व्यपारी बन गए है सरकार भी उनके चरणों में जाकर नाक रगड़ती है। अलोम विलोम करते-करते पुत्र पैदा करने की दवा बेच रहे है क्या यह लिंग भेद नही है?

जब तक देश की सरकार चलाने वाले कर्णधार धर्म ग्रंथो या धर्मीक भावना से ऊपर उठ कर आचरण नही करते तब तक देश चहुमुखी एंव खुशहाल नही हो सकता जहां तक सीमा पार आतंकवाद का सवाल है तो वह मुद्दा उतना गम्भीर नही है जितना देश के आंतरिक आतंकवादी जातिवादी समस्या है।

बाबासाहेब अम्बेडकर ने आजादी के असली महत्व को बखूबी समझा था।

बाबा साहेब, सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक हैं। वे जमींदारों की आर्थिक गुलामी और ऊँची जातियों की सामाजिक गुलामी से शोषितो की मुक्ति के भी अक्षय प्रतीक हैं। पी.एच.डी. और डी.एस.सी. होते हुए भी उन्हें अपने कार्यस्थल पर अपमान सहना पड़ा। उन्हें यह समझते देर नहीं लगी कि राजनैतिक स्वतंत्रता तब तक अर्थहीन रहेगी जब तक उसके साथ-साथ सामाजिक बदलाव नहीं होता, जब तक शूद्रों और महिलाओं को गुलामी से मुक्ति नहीं मिलती। राष्ट्रीय आंदोलन में उन्होंने इन्हीं लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए काम किया।
अम्बेडकर ने स्वाधीनता आंदोलन के लक्ष्यों में सामाजिक परिवर्तन को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे आश्चर्य कर देने वाली मेधा के धनी थे और उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य, शोषित वर्गो की बेहतरी था। वे निरंतर हमारे देश की जाति प्रथा पर प्रश्नचिन्ह लगाते रहे। उन्होंने इस देश में राजनैतिक व सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया को गति दी। यह अकारण ही नहीं था कि वे कमजोर वर्गों के संघर्ष के प्रतीक और अगुवा थे। और यही कारण है कि देश के सामाजिक और राजनैतिक परिदृश्य में उनकी भूमिका को नकारने या कम करके प्रस्तुत करने की कोशिशें हो रही हैं। चूंकि उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज करना संभव नहीं है। इसलिए प्रयास किया जा रहा है कि उन्हें देवता बनाकर मंदिर में प्रतिष्ठापित कर दिया जाये और फिर उनके प्रिय सिद्धांतों और आदर्शों को कचरे की टोकरी में फेक दिया जावे। उनके योगदान के महत्व को घटा कर प्रस्तुत करने के भी योजनाबद्ध प्रयास हो रहे हैं।

जातिवादी आतंकवाद पर संघ आज भी मौन है पूर्व में भी मौन था!

अम्बेडकर के चावदार तालाब, कालाराम मन्दिर और मनुस्मृति दहन को नेतृत्व प्रदान कर सामाजिक सुधार के लिए उग्र आंदोलनों की शुरुआत की। आर.एस.एस. को तो जाने दीजिए उच्च जाति के किसी भी संगठन ने इन आंदोलनों का समर्थन नहीं किया। केवल मन्दिर में प्रवेश के प्रश्न पर कुछ साम्प्रदायिक लोगों ने अम्बेडकर को मरियल-सा समर्थन दिया था।
बहरहाल, देखिए हिन्दुत्व के प्रमुख विचारक सावरकर के पास कहने के लिए क्या है: 'मनुस्मृति वह धर्म-ग्रन्थ है जो कि हमारे हिन्दू राष्ट्र के लिए वेदों के बाद पूजा के सर्वाधिक योग्य है और जो प्राचीन काल से ही हमारी संस्वृळति, रीति-रिवाजों, विचार एवं व्यवहार का आधार रहा है। यह पुस्तक सदियों से हमारे राष्ट्र की आध्यात्मिक एव पारलौकिक गति को संहिताबद्ध करती रही है... आज मनुस्मृति हिन्दू कानून है।' (वी.डी. सावरकर समग्र में 'वूमेन इन मनुस्मृति', हिन्दी में सावरकर की किताबों का संकलन, प्रभात, नई दिल्ली, 2002, पृ. 416)
वैषम्य पर पुनः गौर कीजिए: आम्बेड़कर मनुस्मृति को जलाते हैं, सावरकर उसकी गौरव अभ्यर्थना करते हैं। वस्तुतः आज की तारीख तक साम्प्रदायिक लोगों के एक भी महत्वपूर्ण नेता ने कभी भी मनुस्मृति को शोषितो एवं स्त्रियों के लिए उत्पीड़क होने के कारण खारिज या उसकी आलोचना नहीं की है।
अनु. जातियो- जनजातियो से जुड़े मुद्दों पर हिन्दुत्ववादी ताकतों का रवैया दोहरा रहा है। चुनावी या दूसरे उद्देश्यों के लिए इन वर्गो(शुद्रो) को अपनी ओर मिलाने के लिए हिन्दुत्ववादी ताकतें सतही तौर पर इनकी की मॉंगों का समर्थन करती हैं, वहीं गहरे स्तर पर वे इन मॉंगों को मरोड़कर प्रस्तुत करती हैं। या उनकी जड़ खोदने का काम करती हैं। नौकरियों एवं शैक्षणिक सुविधाओं के लिए आरक्षण इसी प्रकार का एक मुद्दा है। आधिकारिक रूप से संघ परिवार आरक्षण का विरोध नहीं करता लेकिन वह इसके विरुद्ध कानाफूसी अभियान चलाता है। जब वी.पी. सिंह की सरकार ने मण्डल आयोग की सिफारिशोें के क्रीयान्वयन की घोषणा की तो साम्प्रदायिक ताकतों ने इसका आधिकारिक रूप से विरोध न करते हुए भी मुद्दे की हवा निकालने के लिए राम मन्दिर आंदोलन को तेज कर दिया।

यदि हमे असली हमे असली आजादी चाहिए तो हमारे महापुरुषो के विचारो को गहराई से प्रत्येक नागरिक को चिंतन करना होगा।

भगत सिंह के क्रान्तिकारी विचारो का उल्लेख कर यह विचार समाप्त करता हूँ।

उठो!
तुम 'अछूत' भाइयों, दलित मजदूरों
उठो और अपने इतिहास को जानो।
तुम सच्चे सर्वहारा संगठित हो।
तुम्हारे पास खोने के लिए बेड़ियों के
सिवाय कुछ नहीं।
विद्रोह में उठ खड़े हो!
धीरे-धीरे सुधारों से कुछ मिलने वाला नहीं,
सामाजिक व्यवस्था का क्रान्तिकरण करो,
बगावत करो और उथल-पुथल मचा दो,
मुक्ति तुम्हारा ध्येय है!
उठो!
राष्ट्र की
वास्तविक शक्ति एवं आधार
तुम सोए हुए शेर
उठो और विद्रोह करो।
- भगत सिंह

आप सभी को स्वतन्त्रता दिवस की पुनः बधाई आशा है की धर्म,जाति से ऊपर उठ कर हम भारतीय होने में गर्व करेंगे।
जय भीम-जय भारत!

√ सुरेश पासवान, राष्ट्रीय महासचिव, वी लव बाबासाहेब समाजिक संगठन


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Saturday, 13 August 2016

मध्यप्रदेश में रोज अम्बेडकरवादियो की टीम में युवा जुड़ रहे है

इंजी. राहुल कराड़े, जिलाध्यक्ष खरोग (म.प्र)
मध्यप्रदेश ओजस्वी अम्बेडकरवादियो की टीम में इंजी. राहुल कराड़े, जिलाध्यक्ष खरोग की जवाबदारी के साथ शामिल हुए। इनकी नियुक्ति राकेश महाले-प्रदेश अध्यक्ष(म.प्र), वी लव बाबासाहेब आईटी एंव सोशल मिडिया संगठन ने की है।
आपको बता दे इंजीनियर राहुल कराड़े ने अपनी जिले की अम्बेडकरवादी कार्यकारणी भी बना ली है जिसमे प्रदीप कराड़े जिला उपाध्यक्ष, अनिता वासुरे जिला महासचिव, मनीष वर्मा कोषाध्यक्ष, गणेश वर्मा जिला महासचिव को बनाया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष माला दास, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष- अविनाश गाडवे, विवेक भारती, सुरेश पासवान- राष्ट्रीय महासचिव, पंकज छायवान- राष्ट्रीय सचिव, शौर्य गौतम- राष्ट्रीय प्रवक्ता, गजेन्द्र जाटव- संस्थापक सदस्य ने इस नियुक्ति पर बधाई प्रेषित की है वही मध्यप्रदेश अम्बेडकरवादियो की टीम ने भी इंजीनियर राहुल कराड़े एंव उनकी टीम को क्रांतिकारी जय भीम के साथ अभिवाद किया है।
In Association with Amazon.in राकेश महाले- प्रदेश अध्यक्ष ने फिर कहा की सितम्बर तक मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिला अध्यक्षो की नियुक्ति हो जायेगी अब मध्यप्रदेश में बुद्ध, फुले, बिरसा, अम्बेडकर की वैचारिक क्रांति से समाजिक क्रांति होगी जो प्रत्येक नागरिको के हित में होगी।
प्रदीप कराड़े जिला उपाध्यक्ष,खरगोन
अनिता वासुरे, जिला महासचिव
मनीष वर्मा कोषाध्यक्ष
Dr. Babasaheb Ambedkar

Friday, 12 August 2016

गुजरात में भी अम्बेडकरवादियो की युवा टीम बनी

भरत छत्रालिया,प्रदेश उपाध्यक्ष
हर्षित बौद्ध, प्रदेश महासचिव

गुजरात: अभी भी वक्त है एक हो जाओ आपस के गिले शिकवे भूल कर बुद्ध, अशोक, कबीर, रविदास, फुले, साहूजी, बिरसा, नारायणागुरु, भगत सिंह, अम्बेडकर, विनोबा, पेरियार के संघर्षो को जानो और उनके बलिदान का सम्मान करते हुए अपना नैतिक, समाजिक एंव देश हित में मानवता के लिए संगठित हो जाओ।
राजनैतिक मत भेद भूल कर समाजिक समानता के लिए प्रबुद्ध भारत अभियान का हिस्सा बनिए।
गुजरात की प्रयोगशाला साम्प्रदायिक हिंसा, कत्लेआम के नाम से देश को कलंकित करती है। अभी एक माह पूर्व पुरे देश ने ही नही विश्व ने भारत में खतरनाक आतंकवाद का चेहरा देखा विश्व अभी तक तालिबानी, ISIS आतंक से भयभीत था किन्तु जब उसने धर्म के नाम पर "जातिवादी आतंकवाद" का घृणित चेहरा ऊना में घटित कथित गौ रक्षको की आतंकित कर देने वाली तस्वीर वीडियो के माध्यम से देखी तो मनवीय संवेदना रखने वाला हर व्यक्ति दहल गया-काप उठा जबकि इससे भी भयानक आतंक हम भारत के लोग पिछले 5000 वर्षो से देखते और सहन करते हुए आये है आए दिन देश में धार्मिक एंव राजनैतिक मान्यता प्राप्त कई संगठन स्वतन्त्र रूप से आतंक की नई-नई खोजे ईजात कर रहे है इसका मुख्य स्रोत मनुस्मृति एंव अन्य धर्म ग्रन्थ है जिसे शँकराचार्य जैसे बड़े धार्मिक पण्डित प्रमाणिक करते है। देश के राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, न्यायधीश जैसे सर्वोच्च पदों पर विराजमान व्यक्ति भी इन्ही धार्मिक गुरुओ के चरण स्पर्श करते है इनके आगे नतमस्तक है अर्थात ऐसे लोगो को सरकारी मान्यता प्राप्त है।
बुद्ध, अशोक, कबीर, रविदास, फुले, साहूजी, बिरसा, नारायणागुरु, भगत सिंह, अम्बेडकर, विनोबा, पेरियार जैसे सैकड़ो महापुरुषो ने अपने-अपने समय में इस जातिवादी आतंकवाद के खिलाफ क्रान्ति की जिससे देश के लोगो को मानवीय गुणों की हकित पता चली थी बाबासाहेब अम्बेडकर ने विपरीत परिस्थितियों में जो संघर्ष किया उसे भारत ही नही बल्कि विश्व भी सम्मानजनक दृष्टि से देखता है तभी तो विश्व उन्हें ज्ञान का प्रतिक कह कर सम्बोधित करता है। ऐसा महापुरुषो के त्याग को भारत के इतिहासकार मनुवादी आकाओ के इशारे पर भुला देना चाहते है देश की युवा पीढ़ी को पाखण्ड एंव धार्मिक कोरी गप्प मान्यताओ से मानसिक गुलामी की बेड़ियों से जकड़ रहे है किन्तु अब सोशल मिडिया के कारण हजारो अम्बेडकरवादी-मानवतावादी युवा हमारे असली महानायकों-महापुरुषो से रूबरू करवा रहे है जिससे देश अब बुद्ध+अम्बेडकर युग के रूप में देख रहा है। अब अमानवीय अत्याचार, जातीय आतंकवाद के विरोध में लाखो युवा वैचारिक आंदोलन सड़को पर दिखा कर सरकार को मजबूर कर रहे है की अब धर्म के नाम पर जो आतंकवाद का खेल चल रहा है उस पर प्रतिबन्ध लगाये अन्यथा अंजाम तख़्ता पलट का नही बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का होगा जिसका नाम है अम्बेडकरवाद, प्रबुद्ध भारत।
यह बयान सुरेश पासवान, राष्ट्रीय महासचिव, वी लव बाबासाहेब संगठन ने व्यक्त किए उन्होंने बताया की पुरे देश के सोशल मिडिया में सक्रिय अम्बडेकरवादी युवाओ को संगठित किया जा रहा है अब हम गैरराजनैतिक विचारधारा से शुद्ध अम्बेडकरवादी विचारधारा से समाजिक परिवर्तन की मशाल को देश के कोने -कोने तक पहुँचायेंगे।
इसी श्रंखला में हितेश सोलंकी, प्रदेश अध्यक्ष-गुजरात ने अपनी प्रदेश स्तरीय अम्बेडकरवादी युवाओ की जुझारू टीम की घोषणा की है उन्होंने यह टीम माला दास-राष्ट्रीय अध्यक्ष, अविनाश गाडवे-राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विवेक भारती- राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पंकज छायवान-राष्ट्रीय सचिव, शौर्य गौतम-राष्ट्रीय प्रवक्ता, सुरेश पासवान-राष्ट्रीय महासचिव, गजेन्द्र जाटव- संस्थापक सदस्य, हरिलाल सोलंकी-प्रदेश समन्वयक एंव अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियो के मार्गदर्शन में किया है।
प्रदेश कार्यकरणी:
1. भरत छत्रालिया- प्रदेश उपाध्यक्ष
प्रदेश महासचिव
1. हर्षित बौद्ध
2. अरुण पटेल
प्रदेश सचिव
1. भारत परमार
2. तरुण कपाडिया
3. अजय चावडा
4. मयूर दुलेरा
5. नरेश परमार
हितेश सोलंकी, प्रदेश अध्यक्ष-गुजरात
अरुण पटेल, प्रदेश महासचिव
तरुण कपाडिया, प्रदेश सचिव
मयूर दुलेरा, प्रदेश सचिव
नरेश परमार, प्रदेश सचिव
अजय चावडा, प्रदेश सचिव
भारत परमार, प्रदेश सचिव
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Wednesday, 10 August 2016

गुजरात में भी अम्बेडकरवादियो की टीम बनाने की मुहीम शुरू हुई

गुजरात: बुद्ध, फुले, बिरसा, अम्बेडकर, पेरियार की समाजिक क्रांति की नई प्रयोगशाला साबित हुआ है। ऊना में कथित गौ रक्षको की हैवानियत की तस्वीर पुरे भारत ही नही विश्व ने देखी है। धर्म के नाम पर मानवता को शर्मशार करने वालो के खिलाफ पूरा देश आंदोलित हो चूका है। इसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ गुजरात के अम्बेडकरवादियो को जाता है। हम पूर्व में भी बता चुके है की सोशल मिडिया में लाखो अम्बेडकरवादी मनुवादी आतंक के खिलाफ जन जागरण कर रहे है। वे किसी भी जातिवादी हिंसा के खिलाफ बेख़ौफ़ अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त कर रहे है सदियो से चले आ रहे धर्म के नाम पर अमानवीयता के खिलाफ संगठित आवाज उठा रहे है जातिवादी हिंसा को पूर्व में सरकार एंव मिडिया हल्के में लेती थी किन्तु अब शिक्षित अम्बेडकरवादी युवाओ की मुहीम का नतीजा है की जातिवादी उत्पीड़न को आतंकवाद का नाम दिया जाये इसके लिए जोर शोर से तार्किक-तथ्यात्मक माँग उठ रही है।
 गुजरात में विगत दिनों हुए क्रांतिकारी-ऐतिहासिक कदम मृत गायो को उनके कथित रक्षको-पूजको के हवाले कर के सभी अनुसूचित जाति-जनजातियो के लोगो ने सामूहिक प्रतिज्ञा ली की अब वे मृत गायो का अंतिम संस्कार नही करेंगे।
हिन्दू धर्म द्वारा थोपी गई इस घृणात्मक गुलामी की बेड़ियो से मुक्त होने की कोशिस पुरे देश के लोगो के लिए क्रांतिकारी एंव प्रेणादायक कदम साबित हो रही है यह सोशल मिडिया द्वारा खूब प्रचारित किया भी जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक मिडिया, प्रिंट मिडिया पर हम ब्राह्मणवादी-जातिवादी होने का जो आरोप लगते आये है वह पूरी तरह सत्य साबित हुआ।
वी लव बाबासाहेब, आईटी एंव सोशल मीडिया संगठन पुरे देश के अम्बेडकरवादी युवाओ को एक मंच पर लाने का जी तोड़ प्रयास कर रहा है। उत्तरप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के बाद अब गुजरात में संगठन को सक्रिय करने हेतु दो अहम नियुक्तियों की घोषणा माला दास, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की है।
वरिष्ठ अम्बेडकरवादी हरिलाल सोलंकी को संगठन का समन्वयक नियुक्त किया है।
युवा अम्बेडकरवादी, छात्र नेता हितेश सोलंकी को उनकी सक्रियता की वजह से इन्हें प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया गया है गौरतलब हो कि हितेश मात्र 20 वर्ष के है किन्तु वे एक जुझारू,क्रन्तिकारी छात्र नेता के रूप में जाने जाते है इनकी पूरी टीम ने ऊना काण्ड के खिलाफ आंदोलन में बड़ चढ़ कर हिस्सा लिया था, हितेश सोलंकी विगत 2 वर्षो से संगठन से भी जुड़े है।
हरिलाल सोलंकी ने बताया कि वे गुजरात के हर जिलो से अम्बेडकरवादियो की ऊर्जावान टीम तैयार करने में हितेश की मदत करेंगे।
हरिलाल सोलंकी, प्रदेश समन्वयक
हितेश सोलंकी, प्रदेश अध्यक्ष

Monday, 8 August 2016

मध्यप्रदेश के अम्बेडकरवादियो की टीम की दूसरी सूची भी जारी


राकेश महाले, प्रदेश अध्यक्ष(म.प्र), वी लव बाबा साहेब आईटी एंव सोशल मिडिया संगठन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष माला दास की सहमती से अपनी प्रदेश कार्यकारणी की आज दूसरी सूचि भी जारी कर दी है. राकेश महाले ने बताया कि टीम में अम्बेडकरवादी, शिक्षित, युवाओ को मौका दिया गया है ताकि वे सोशल मिडिया के माध्यम से हमारे महापुरुषो के मानवतावादी विचारो से समाजिक क्रांति की मुहीम को सफल बना सके हम मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले, तहसील, ग्राम तक सक्रिय अम्बेडकरवादी युवाओ की ऊर्जावान टीम तैयार करेंगे यह लक्ष्य हम अक्टूबर 2016 तक हासिल भी कर लेंगे।
गौरतलब हो कि विगत दिनों अविनाश गाडवे, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एंव सुरेश पासवान, राष्ट्रीय महासचिव के साथ राकेश महाले की बैठक हुई थी जिसमे कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। जिसे आने वाले दिनों में साकार करने का लक्ष्य है।
महाले ने बताया कि सोशल मिडिया के महत्व को नजरअंदाज नही किया जा सकता है। आज पुरे देश के युवा वी लव बाबासाहेब के द्वारा चलायें जा रहे प्रबुद्ध भारत अभियान से जुड़ रहे है। युवाओ का झुकाव इस संगठन के लिए इसलिए है क्योकि यह गैरराजनैतिक संगठन है। बाबासाहेब अम्बेडकर के कहा था समाजिक क्रांति के बिना राजनैतिक क्रांति अधूरी है इसलिए हम समाजिक क्रांति के इस आंदोलन को जनांदोलन में तब्दील करने के लिए प्रयासरत है आज देश भर में मनुवाद, जातिवाद को आतंकवाद से जोड़ कर देखा जा रहा है इसका श्रेय सोशल मिडिया पर युवाओ द्वारा जो जागृति अभियान चलाया जा रहा है उसी का परिणाम है। देश के पीएम ने जो कल टिप्पणी की वह राजनैतिक हो सकती है किन्तु हमारी जागृति के कारण उन्होंने बयान दिया है हमे सच और झूठ पर फर्क करना है किसी के बयानों पर हम भावुक नही होंगे दोषियों पर कार्यवाही हो यही हमारी मुख्य मांग रहेगी।

प्रदेश पदाधिकारियो की दूसरी सूची:-
महासचिव
प्रशांत हुमनेकर, पार्षद
प्रवक्ता
कृष्णकांत चौरासे
सचिव
1. पुरुषोत्तम भारतीय
2. कपिल मेश्राम
जिलाध्यक्ष
1. बंटी सोलँकी- धार
2. दिनेश गोलू बुलबाके- बैतूल


Sunday, 7 August 2016

मारना है तो मुझे मारो दलितों को नहीं- नरेन्द्र मोदी

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एक माह बीतने के बाद कथित दलितों की याद कैसे आई? यह प्रश्न हर भारतीयों के मन में होना चाहिए, यदि आपके पास वह मारपीट का वीडियो हो तो अभी एक बार फिर देखिये कैसे मोदी जी के गृह राज्य गुजरात में पुलिस थाना के सामने सरेआम निहत्ते, गरीब, युवको को अर्ध नग्न करके लोहे की राड से बेरहमी से एक बार नहीं बार बार मारा जा रहा था वह बेचारे युवक बंधे थे यह कथित गाय के बच्चे जिन्हें गौ रक्षक कहा जाता है वे गाय के चमड़े से बने हर वस्तु का उपयोग तो करते है, किन्तु उसी मरी गाय के चमड़ा निकालने पर इन्शानो को इस बेरहमी से मार रहे थे कि जैसे वे बेचारे मनुष्य नही है. यह दंड देने का प्रावधान किसने दिया? यह संस्कार किस धर्म ग्रन्थ ने दिए? सूअर भगवान का अवतार, गाय में तैतीस करोड़ देवी-देवता उसे माँ का दर्जा किन्तु इस संसार में अपने जैसे हाड़ मॉस के मनुष्य को पशु से बदत्तर किस धर्म ग्रन्थ ने सिखाया है और क्यों? बेचारे उन चार युवको को पुरे शहर मे बंधक बना कर क्यों अपमानित किया जा रहा था? आखिर उनका कसूर क्या था? सदियों से ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने मजबूर किया है की वे मरे हुए पशु उठाये. जो गाय को अपनी माता बोलते है वे अपनी जिन्दा गाय को सडको, चौराहों, फुट्पातो में आवारा की तरह क्यों छोड़ देते है? उन्हें प्लास्टिक खाने पर क्यों मजबूर किया जाता है? देश भर की गौ शालाओ में क्यों हजारो गाये अकाल मृत हो रही है? कल समाचार प्राप्त हुआ की ५०० से ज्यादा गाय राजस्थान की गौ शाळा में मृत हो गई गाय के बेटो को उनकी असमायिक म्रत्यु पर दुःख क्यों नहीं हुआ? या जिनकी गलतियो-लापरवाहियो की वजह से वे गाये मृत हुई उन्हें किसी गौ रक्षक ने लोहे की राड से क्यों नहीं मारा? प्रश्न कई है इनका उतर कथित धर्म के ठेकेदार क्यों नहीं देते? इस देश का कानून धर्म है? यह देश धर्म ग्रंथो से चलता है या संविधान से? देश में हर प्राणी की सुरक्षा का दायित्व सरकार का है इसलिए तो पुलिस, फ़ौज, सुरक्षा गार्ड्स है फिर यह गौ रक्षक क्यों बन रहे है? मरने के बाद गायो की याद इन्हें क्यों आती है? गौ रक्षक गायो की वजाए कुत्ता क्यों पालते है? इस वीडियो को जब भी देखता हूँ तो इन कथित गौ रक्षको को इन्शान कहने में शर्म आती है क्या यही है धार्मिक होने का सबूत इतनी मर्दानगी है तो जाओ कश्मीर में लड़ो देश द्रोहियों से, करो दो-दो हाथ आतंकियों से आखिर तुम भी तो उन्ही की तरह आतंकी ही हो. रोज कोई न कोई खबर मिल रही है की कथित गाय के रखवालो ने बेकसूरों को अमानवीयता की हद लांघते हुए उन्हें मारा पिटा, आज कल तो पेशाब भी पिला रहे है. पेशाब पीना-पिलाने का यह जो शौक इजात किया है वह तुम सभी पर क्यों थोप रहे हो? तुम्हे पेशाब अच्छी लगती है तो सुबह-शाम रोज पियो अरे मै तो कहता हूँ की उसे रात में भोजन करने के बाद भी पीओ सुना है एक नेता जी जिनका नाम घोटाले में उछला था आज कल उनके अच्छे दिन आ गये है तो वे गडकरी जी से मंत्रीजी के नाम से ज्यादा जाने जाते है उन्होंने तो कहा है की वे रोज गाय का पेशाब पीते है उनका डायबिटीज भी ठीक हो गया है. ग्रंथो में तो शुद्धि की विधि गौ मूत्र बताई गई है. अब यह नई खोज मंत्री जी ने की है. अब आते है पीएम साहेब के प्रवचन पर जो उन्होंने दिल्ली में दिए वे देश को उपदेश देने वाले पीएम के नाम से इतिहास में दर्ज होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गौ रक्षकों को असमाजिक तत्व घोषित कर दिया है.पीएम कहा कि 'मुझे इस बात पर गुस्सा आता है कि लोग गाय की रक्षा के नाम पर दुकान चला रहे हैं. उनमें से अधिकतर असामाजिक तत्व हैं जो गाय रक्षा के नाम पर चेहरा छिपाते हैं. मैं राज्य सरकारों से कहूंगा कि ऐसे लोगों पर दस्तावेज़ तैयार करें क्योंकि उनमें से 80 फीसदी असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाएंगे जिसे कोई भी समाज मान्यता नहीं देगा.' उन्होंने यह भी कहा कि अधिकतर गायें कत्ल नहीं की जातीं बल्कि पॉलिथिन खाने से मरती हैं. अगर ऐसे समाजसेवक प्लास्टिक फेंकना बंद कर दें तो गायों की बड़ी रक्षा होगी. गनीमत है कि प्रधानमंत्री ने उन्हें गौ गुंडा नहीं कहा क्योकि जब मै यही शब्द बोलता हूँ तो कई को बुरा लग जाता है चलिए पीएम ने गौ रक्षा के नाम पर उत्पात मचा रहे लोगों को सिरे से अपराधी घोषित कर दिया है. अभी तक ये लोग गौ रक्षा की आड़ में धर्म रक्षा और धर्म रक्षा की आड़ में राष्ट्र रक्षा का फर्जीवाड़ा कर रहे थे. एक गाय के नाम पर अख़लाक की निर्मम दिन दहाड़े हत्या और उसके बाद राजनीति हुई वह कितनी भयानक है. इस राजनीति का आधार यही था कि गाय के नाम पर कोई दलील नहीं है. कोई तर्क नहीं है. गाय के नाम पर जो हम कहेंगे वही सही है. दरअसल गाय का मुद्दा एक ऐसा मुद्दा था जिसके दम पर सभी को लग रहा था कि गाय का नाम लेते ही कोई कुछ नहीं बोलेगा. यह तो अखिल भारतीय धार्मिक आस्था है. शुक्रिया कहिये गुजरात के समाजिक परिवर्तन की क्रान्ति को आंदोलनकारियो ने मरी हुई गाय फेंक कर बता दिया कि जिनकी मां है वही अंतिम संस्कार करें. जिस तरह से गाय के नाम पर चार युवकों को मारा गया वह उस राजनीतिक चुप्पी की पराकाष्ठा थी जिसे एक तरह की विचारधारा के लोग शह दे रहे थे. प्रधानमंत्री के अनुसार अगर इनका दस्तावेज़ बने तो पता चलेगा कि कौन संघ परिवार से है और कौन दूसरे परिवार से है. पता चल ही जाना चाहिए. तरह तरह के जागरण और मंच नाम से बने इन संगठनों की दुकान का लाइसेंस नंबर अब वाकई देश के सामने रख देने का वक्त आ गया है. प्रधानमन्त्री जी ने जो भी कहा वह पिछले जुमलो की तरह भावनाओं में बहा कर उतरप्रदेश के चुनावों में नुकशान न हो इसलिए याद करिये लोकसभा में उन्होंने अपने आपको दलित का बेटा कहा था आप भावनाओं में बह गए थे और वोट अपना दुःख दर्द समझने वाले को दे बैठे इन्होने सिवाए बाबासाहेब आंबेडकर का नाम लेकर उनके छाया चित्रों की पूजा के अतिरिक्त कुछ नही किया है आई आई टी मद्रास में अम्बेडकर-पेरियार संगठन पर बैन इन्ही की सरकार ने लगाये दबाव बढने के कारण उसे वापस हटाया? रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या के जिम्मेदार वीसी, बंगारू दात्रे, स्मृति ईरानी पर अभी तक कोई कार्यवाही क्यों नही हुई? बाबासाहेब अम्बेडकर की यादो का भवन जो मुम्बई में स्थित था उसे आधी रात में क्यों ध्वस्त किया गया? याद है आपको लखनऊ में इन्होने छात्रों के बिच रोहित वेमुला का जिक्र भी लगभग एक माह के बाद ही किया था आखिर परिणाम क्या हुआ हमनें एक सच्चा अम्बेडकरवादी खोया. दिल्ली में रोहित के परिवार को न्याय दिलाने पर हुए आन्दोलन पर लडकियों के साथ पुलिस की मौजूदगी में गुंडागर्दी हुई वह पुरे देश ने देखा ऐसा बर्बर रूप सरकार बिना संरक्षण से सम्भव हो सकता है. बीजेपी के नेता आये दिन हमे गालिया देते है, आरक्षण को कोसते है? यदि पीएम साहेब दलित है तो उन्हें कष्ट क्यों नही होता उनके राज में यह अन्याय-अत्याचार क्यों हो रहा है? गुजरात काण्ड एंव मायावती जी पर की गई अभद्र टिप्पणी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में गुंडागर्दी करने वाले बीजेपी के कार्यकर्ताओं का यह दुसाहस कैसे बढ़ा? उन्होंने मिडिया के सामने सरेआम जाति सूचक गालियाँ क्यों दी किसके इशारे पर दी? पीएम और आर एस एस गुजरात आन्दोलन भयभीत है उन्हें सत्ता से ज्यादा डर हिन्दू धर्म के शुद्रो से है आखिर इन्होने धर्म ग्रंथो में लिखी बाते मानने से इनकार कैसे कर दिया? अब मरी हुई गायो को कौन उठाएगा? हमारी शाखाओ में चड्डी पहन कर कौन आयेंगे? अंत में पीएम साहेब से एक सवाल यदि आपको ज्ञात है की ८०% गौ रक्षक असमाजिक तत्व अर्थात गुंडे है तो उन्हें अभी तक खुली छुट क्यों मिली है तुरंत प्रतिबन्ध क्यों नही? आप के नेता, मंत्री हमारी माँ- बहनों को वैश्य क्यों बोलते है? आप सभी भारतीयों से अपील है की बीजेपी देश में धर्म, जाति के नाम से नफरत की राजनीति करने के लिए रोज नये-नये फंडे लाएगी हमे जागरूक रहना है यह एकता-चेतना जो रोहित आन्दोलन से शुरू हुई है और गुजरात से क्रान्ति की नई मिसाल बन गई है इसे कायम रिखियेगा अफवाहों में न आइयेगा.
लेखक: सुरेश पासवान, राष्ट्रीय महासचिव वी लव बाबासाहेब आईटी एंव सोशल मिडिया संगठन
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